8th Pay Commission: देशभर में बैठकों का सिलसिला जारी, अब भुवनेश्वर दौरे की तैयारी

Saroj kanwar
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केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वें वेतन आयोग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में कर्मचारियों और हितधारकों के साथ संवाद तेज कर दिया है। आयोग लगातार विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर सुझाव और मांगें एकत्र कर रहा है, ताकि अंतिम सिफारिशों को अधिक व्यापक और संतुलित बनाया जा सके।

देश के कई शहरों में हो चुकी हैं बैठकें

अब तक आयोग की बैठकों का आयोजन दिल्ली, पुणे, देहरादून और हैदराबाद जैसे प्रमुख शहरों में किया जा चुका है। इन बैठकों में केंद्रीय कर्मचारियों, संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से विस्तार से चर्चा की गई।

इसके अलावा आगामी कार्यक्रम के तहत आयोग का दौरा कई अन्य क्षेत्रों में भी तय किया गया है।

आने वाले दौरे और प्रस्तावित कार्यक्रम

आयोग के तय शेड्यूल के अनुसार:

  • 1 से 4 जून 2026 के बीच श्रीनगर में बैठकें आयोजित होंगी
  • 8 जून 2026 को लद्दाख के लेह जिले में चर्चा होगी
  • 22 और 23 जून 2026 को लखनऊ में बैठकें प्रस्तावित हैं
  • 6 और 7 जुलाई 2026 को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में आयोग का दौरा रहेगा

भुवनेश्वर दौरे को लेकर आयोग ने 26 मई को वित्त मंत्रालय के तहत आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी किया है।

भुवनेश्वर दौरे का उद्देश्य क्या है?

इस दौरे के दौरान आयोग केंद्रीय कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, संस्थानों और अन्य संबंधित समूहों से सीधे संवाद करेगा। जो संगठन बैठक में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें 15 जून 2026 तक ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के लिए आवेदन करना होगा।

इसके लिए यह भी जरूरी होगा कि संगठन अपने ज्ञापन के बाद प्राप्त “यूनिक मेमो आईडी” को आवेदन के साथ दर्ज करें। बैठक का स्थान और पूरा शेड्यूल बाद में अलग से घोषित किया जाएगा।

31 मई 2026 तक जमा करने होंगे सुझाव

आयोग ने सभी हितधारकों से पहले ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से सुझाव और ज्ञापन आमंत्रित किए थे। इन्हें जमा करने की अंतिम तिथि 31 मई 2026 निर्धारित की गई है।

इन सुझावों के आधार पर आयोग कर्मचारियों और पेंशनर्स की वेतन, भत्ते और अन्य लाभों से जुड़ी मांगों का मूल्यांकन करेगा।

8th Pay Commission का मुख्य फोकस

8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। यह एक अस्थायी आयोग है, जिसका उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन ढांचे की समीक्षा करना है।

इसमें सबसे अहम मुद्दा “फिटमेंट फैक्टर” माना जा रहा है, जो नई सैलरी तय करने का प्रमुख आधार होता है। इसी के आधार पर वेतन वृद्धि का निर्धारण होता है, इसलिए यह विषय कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट कब तक आएगी?

आयोग को अपनी रिपोर्ट गठन की तारीख से 18 महीनों के भीतर सौंपनी है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि इसकी अंतिम सिफारिशें वर्ष 2027 के मध्य तक सामने आ सकती हैं।

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