8th Pay Commission: क्या है Pay Scale Merger? जानिए कर्मचारी संघ क्यों कर रहे हैं इसकी मांग

Saroj kanwar
6 Min Read

नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब अपने सबसे अहम चरण में पहुंच चुका है। देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग अब व्यापक स्तर पर परामर्श कर रहा है। माना जा रहा है कि आयोग की अंतिम सिफारिशें करीब एक करोड़ मौजूदा और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और भत्तों की दिशा तय करेंगी।

आयोग की सिफारिशों का असर लगभग 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों, जिनमें बड़ी संख्या में रक्षा पेंशनर्स भी शामिल हैं, पर पड़ने की संभावना है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट आने में अभी समय है, लेकिन कर्मचारी संगठनों ने अपनी प्रमुख मांगें आयोग के सामने रख दी हैं। इनमें सबसे बड़ी मांग मौजूदा वेतन संरचना में व्यापक बदलाव की है।

8वें वेतन आयोग का गठन कब हुआ?

केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया था। आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। वहीं, पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन सदस्य-सचिव हैं और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष भी आयोग के प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं।

पे-लेवल मर्जर की मांग क्यों बनी चर्चा का विषय?

कर्मचारी संगठनों की सबसे प्रमुख मांग मौजूदा पे-लेवल के विलय (Pay Level Merger) को लेकर है। यूनियनों का कहना है कि कई अलग-अलग वेतन स्तरों में कार्यरत कर्मचारी समान जिम्मेदारियां निभाते हैं, लेकिन उनके वेतनमान अलग-अलग हैं।

इसी कारण कर्मचारी संगठनों ने लेवल-2 और लेवल-3, लेवल-4 और लेवल-5, लेवल-7 और लेवल-8, तथा लेवल-9 और लेवल-10 को एक समान वेतनमान में शामिल करने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि इससे वेतन असमानता कम होगी और कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा।

लेवल-5 कर्मचारियों के लिए प्रमोशन जैसी राहत की मांग

यूनियनों ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि लेवल-5 के कर्मचारियों को एकमुश्त लेवल-6 में अपग्रेड किया जाए। उनका कहना है कि रेलवे, रक्षा, डाक विभाग और केंद्रीय सचिवालय जैसे विभागों में हजारों ग्रुप-सी कर्मचारी लंबे समय से इसी स्तर पर कार्यरत हैं, जिससे उनकी पदोन्नति और करियर ग्रोथ प्रभावित हो रही है।

न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 69,000 रुपये करने की मांग

कर्मचारियों के सबसे बड़े प्रतिनिधि संगठन नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आयोग के सामने कई अहम सुझाव रखे हैं। संगठन ने न्यूनतम बेसिक वेतन 69,000 रुपये करने की मांग की है।

इसके अलावा यूनियन ने निम्नलिखित सुधारों का भी प्रस्ताव दिया है—

  • वेतन संरचना को अधिक सरल बनाया जाए।
  • मकान और अन्य उपयोगिता भत्तों में सुधार किया जाए।
  • पेंशन व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाए।
  • वर्तमान 3% वार्षिक वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 6% किया जाए।

यूनियन का तर्क है कि कर्मचारियों की आय को महंगाई के अनुरूप बनाए रखने के लिए वेतन वृद्धि की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।

पदोन्नति नीति में सुधार की भी उठी मांग

रिपोर्ट्स के अनुसार, NC-JCM ने आयोग से प्रमोशन प्रक्रिया को अधिक आसान और पारदर्शी बनाने की भी मांग की है। संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही पद पर बने रहते हैं, जिससे करियर में ठहराव की स्थिति बन जाती है।

कर्मचारियों ने रखीं कई अन्य अहम मांगें

वेतन और प्रमोशन के अलावा कर्मचारी संगठनों ने कई सेवा-संबंधी सुविधाओं में सुधार का भी सुझाव दिया है। इनमें शामिल हैं—

  • भविष्य निधि (PF) की निकासी प्रक्रिया को आसान बनाना।
  • मेडिकल रीइम्बर्समेंट दावों का जल्द निपटारा।
  • कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए बेहतर जीवन बीमा सुविधाएं।
  • आयकर से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रियाओं को सरल बनाना।

इन मुद्दों पर आयोग की बैठकों और हितधारकों के साथ हुए संवाद में भी विस्तार से चर्चा हुई है।

देशभर में जारी है परामर्श प्रक्रिया

आयोग ने आम जनता और कर्मचारियों से सुझाव लेने का पहला चरण 15 जून को पूरा किया था। वहीं मंत्रालयों और सरकारी विभागों से आंकड़े और सुझाव लेने की प्रक्रिया 31 जुलाई तक जारी रहेगी।

मार्च से आयोग के सदस्य विभिन्न राज्यों का दौरा कर रहे हैं और कर्मचारी संगठनों, पेंशनभोगी संघों तथा अन्य संबंधित पक्षों से लगातार बातचीत कर रहे हैं। रेलवे, रक्षा और अन्य बड़े विभागों के प्रतिनिधि भी इस परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं।

8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट कब आएगी?

सरकार की निर्धारित समय-सीमा के अनुसार आयोग अपने गठन के लगभग 18 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंप सकता है। ऐसे में संभावना है कि अंतिम सिफारिशें फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच सरकार को प्रस्तुत की जाएं।

हालांकि, पिछले वेतन आयोगों के अनुभव बताते हैं कि रिपोर्ट लागू होने में अतिरिक्त समय लगता है। इससे पहले भी नई वेतन व्यवस्था को पूरी तरह लागू करने में दो से तीन वर्ष का समय लगा था। ऐसे में यदि रिपोर्ट 2027 में आती है, तो कर्मचारियों को नए वेतनमान और अन्य लाभों का पूरा फायदा 2029 या 2030 तक मिल सकता है।

निष्कर्ष

फिलहाल 8वां वेतन आयोग सुझावों और परामर्श के चरण में है। आयोग की अंतिम सिफारिशें अगले कई वर्षों के लिए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन और भत्तों की नई रूपरेखा तय करेंगी। इसलिए देशभर के लाखों कर्मचारी आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *