8वें वेतन आयोग में DA मर्ज होने की चर्चा तेज, सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में हो सकती है बड़ा उछाल

Saroj kanwar
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केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद अब 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) से जुड़ गई है। आयोग का गठन हो चुका है और अब लाखों सरकारी कर्मचारी इसकी सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इस बीच कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के साथ बैठकों का दौर जारी है, जहां वेतन, भत्तों और नई सैलरी संरचना को लेकर कई अहम मांगें रखी जा रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में शामिल करने की मांग को लेकर हो रही है।

DA को बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग तेज

‘ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन’ (AINPSEF) समेत कई कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने प्रस्ताव रखा है कि महंगाई भत्ते को अलग रखने के बजाय बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाए। संगठनों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के मुकाबले साल में दो बार मिलने वाला DA पर्याप्त नहीं है। इसलिए इसे स्थायी रूप से वेतन संरचना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बेसिक पे और डीए अलग-अलग दिए जाते हैं। हर साल जनवरी और जुलाई में डीए में संशोधन किया जाता है।

DA मर्ज होने से कर्मचारियों को क्या फायदा होगा?

अगर 8वें वेतन आयोग में DA को बेसिक सैलरी में शामिल करने का फैसला लिया जाता है, तो कर्मचारियों की कुल सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दरअसल, HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और अन्य भत्तों की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर होती है। ऐसे में बेसिक पे बढ़ने का सीधा असर बाकी सभी भत्तों पर भी पड़ेगा।

इसके अलावा भविष्य में मिलने वाले इंक्रीमेंट, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी सुविधाओं में भी बड़ा फायदा मिल सकता है। यानी सिर्फ मासिक वेतन ही नहीं, रिटायरमेंट बेनिफिट्स भी पहले से ज्यादा हो सकते हैं।

न्यूनतम सैलरी बढ़ाने का भी प्रस्ताव

कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाने की मांग भी की है। AINPSEF ने आयोग को दिए अपने सुझाव में कहा है कि वर्तमान तीन सदस्यीय फैमिली यूनिट मॉडल अब पुराना हो चुका है। इसे बदलकर पांच सदस्यीय परिवार मॉडल के आधार पर सैलरी तय की जानी चाहिए।

फेडरेशन ने इसके लिए नया कैलकुलेशन फॉर्मूला भी आयोग के सामने रखा है।

18 हजार से 60 हजार तक कैसे पहुंच सकती है सैलरी?

फेडरेशन के प्रस्तावित फॉर्मूले के अनुसार, यदि प्रति सदस्य 6,000 रुपये के हिसाब से पांच सदस्यों का खर्च जोड़ा जाए तो बेसिक अमाउंट करीब 30,000 रुपये बनता है। इसके बाद यदि लगभग 60 प्रतिशत DA को बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाए, तो यह राशि करीब 48,000 रुपये तक पहुंच सकती है।

इसके अलावा पोषण, शिक्षा और अन्य जरूरी खर्चों को शामिल करने के बाद न्यूनतम बेसिक सैलरी 55,000 से 60,000 रुपये तक तय किए जाने की मांग की गई है।

अब सभी की नजरें 8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों पर टिकी हैं, क्योंकि इससे लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी और भविष्य की आर्थिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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