8वां वेतन आयोग: कर्मचारियों की इन 5 बड़ी मांगों पर टिकी नजर, जानें क्या है पूरा मामला

Saroj kanwar
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8th Pay Commission Latest Update: आठवें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनसे जुड़े संगठनों से सुझाव लेने की प्रक्रिया तेज कर दी है। आयोग ने 7 अगस्त से नई दिल्ली में कर्मचारी संगठनों और पेंशनर्स के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठकें शुरू की हैं। दिल्ली में यह सिलसिला 10 अगस्त तक जारी रहने की उम्मीद है।

इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनर्स की वेतन, भत्तों और सेवा शर्तों से जुड़ी मांगों को समझना और उनकी राय को आयोग की रिपोर्ट में शामिल करना है। इससे पहले भी आयोग अलग-अलग राज्यों और शहरों में कर्मचारी संगठनों के साथ चर्चा कर चुका है। कोलकाता समेत कई जगहों पर वेतन संशोधन को लेकर प्रतिनिधिमंडलों से सुझाव लिए गए हैं।

इन शहरों में भी पहुंचेगा आठवां वेतन आयोग

दिल्ली के बाद आठवां वेतन आयोग देश के अन्य शहरों का दौरा भी कर सकता है। प्रस्तावित दौरों में चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर शामिल हैं। इन स्थानों पर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगों और सुझावों पर चर्चा की जाएगी।

नवंबर 2025 में गठित आठवें वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। आयोग से अगले साल जून तक सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने की उम्मीद है। इसके बाद केंद्र सरकार रिपोर्ट की सिफारिशों और उनके वित्तीय प्रभाव का मूल्यांकन करके कर्मचारियों के वेतन में बदलाव को लेकर अंतिम फैसला करेगी।

केंद्रीय स्कूलों के शिक्षकों ने भी रखी मांगें

आठवें वेतन आयोग के सामने केंद्रीय सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडलों ने भी अपनी कई मांगें रखी हैं। इनमें शिक्षकों की सेवा शर्तों, प्रमोशन और रिटायरमेंट से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं।

शिक्षकों की एक अहम मांग सेवानिवृत्ति की उम्र बढ़ाकर 65 वर्ष करने की है। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इसका असर केंद्रीय विद्यालयों और अन्य केंद्रीय सरकारी स्कूलों में नई भर्तियों पर भी पड़ सकता है।

शिक्षकों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

शिक्षक संगठनों की ओर से रखी गई मांगों में प्रमोशन से जुड़े प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण हैं। प्रतिनिधिमंडल चाहता है कि स्कूलों में विभागीय शिक्षकों के 50 फीसदी पदों पर प्रमोशन के जरिए प्रिंसिपल नियुक्ति का प्रावधान हो।

इसके अलावा प्रत्येक विषय के हेड के लिए एक नया प्रमोशनल पद बनाने की मांग की गई है। इस पद के लिए ₹5,400 ग्रेड पे का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, वाइस-प्रिंसिपल के ग्रेड पे को बढ़ाकर ₹6,600 करने की मांग भी सामने आई है।

शिक्षक संगठनों ने छुट्टियों की संख्या बढ़ाने की मांग भी उठाई है। उनका तर्क है कि दिल्ली में काम करने वाले शिक्षकों को भी अन्य कर्मचारियों की तरह पर्याप्त अवकाश और बेहतर सेवा सुविधाएं मिलनी चाहिए।

1.83 से 2.46 तक हो सकता है फिटमेंट फैक्टर

आठवें वेतन आयोग को लेकर फिटमेंट फैक्टर भी सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मुद्दों में से एक है। उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों के अनुमानों के मुताबिक फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है।

अगर फिटमेंट फैक्टर में पर्याप्त बढ़ोतरी होती है, तो केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। इसके साथ ही वेतन बढ़ने से कर्मचारियों की खर्च करने की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय कर्मचारियों की आय में बढ़ोतरी का असर केवल उनकी सैलरी तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ सकती है।

हालांकि, फिटमेंट फैक्टर और वेतन वृद्धि को लेकर अंतिम फैसला आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों तथा केंद्र सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

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