पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। 2026 विधानसभा चुनाव में भारी जीत दर्ज कर सत्ता में आई बीजेपी की एक सीट अब विवादों में घिर गई है। टीएमसी ने राजारहाट-न्यू टाउन विधानसभा सीट के नतीजों पर सवाल उठाते हुए दोबारा मतगणना की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि मुस्लिम बहुल बूथ पर बीजेपी को असामान्य रूप से ज्यादा वोट मिले, जिससे चुनाव परिणाम पलट गया।
दरअसल, इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार पीयूष कनोडिया ने टीएमसी के तापस चटर्जी को सिर्फ 316 वोटों के बेहद कम अंतर से हराया था। चुनाव के शुरुआती राउंड्स में टीएमसी बढ़त बनाए हुए थी, लेकिन आखिरी चरण की गिनती में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। विवाद की जड़ बूथ नंबर 164 बना हुआ है, जो ‘मुसलमान पाड़ा’ इलाके में स्थित है और जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता रहते हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बूथ पर बीजेपी को करीब 97 फीसदी वोट मिले। टीएमसी का दावा है कि यह आंकड़ा सामान्य वोटिंग पैटर्न से बिल्कुल अलग है और इसी वजह से पार्टी ने चुनाव आयोग से दोबारा वोटों की गिनती कराने की मांग की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर वोटों का एकतरफा जाना कई सवाल खड़े करता है।
टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि मतगणना के अंतिम दौर में संदिग्ध तरीके से बूथ नंबर 164 के वोटों की गिनती की गई, जिससे बीजेपी को बढ़त मिल गई। उन्होंने यह भी कहा कि मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी दिखाई दी।
इस पूरे मामले में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मुस्लिम बहुल बूथ पर बीजेपी को 97 फीसदी वोट मिलते हैं, तो यह संदेह पैदा करता है और ईवीएम में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह है कि बूथ नंबर 164 की गिनती कथित तौर पर 4 मई को नहीं हुई थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बूथ के वोटों की गिनती अगले दिन यानी 5 मई को अंतिम राउंड में अलग से कराई गई। यही वह चरण था, जहां बीजेपी ने बढ़त हासिल कर सीट अपने नाम कर ली।
अब टीएमसी इस पूरे मामले को चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता से जोड़कर देख रही है। पार्टी का कहना है कि अगर दोबारा मतगणना नहीं हुई, तो जनता के मन में चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल बने रहेंगे। वहीं बीजेपी ने इन आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया है।