सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट: 2008 के बाद सबसे बड़ी मासिक गिरावट — क्या अब खरीदने का सही समय है?

Saroj kanwar
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पिछले कुछ महीनों में सोने की चमक फीकी पड़ती नजर आ रही है, जिससे निवेशकों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या यह गिरावट खरीदारी का सही अवसर है या अभी और गिरावट बाकी है?

इस साल मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने ने अपने अब तक के रिकॉर्ड स्तर ₹1,92,991 प्रति 10 ग्राम (इंट्राडे हाई) को छुआ था। लेकिन इसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली और अब यह लगभग ₹1,42,413 के आसपास ट्रेड कर रहा है। यानी अपने पीक से करीब ₹50,600 (26% से ज्यादा) की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।


क्यों गिर रही हैं सोने की कीमतें?

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने पर दबाव साफ दिखाई दे रहा है। स्पॉट गोल्ड में मंगलवार को 1% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई और यह जून महीने को लगभग 13% की कमजोरी के साथ बंद करने की ओर बढ़ रहा है। यह अक्टूबर 2008 के बाद इसकी सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है।

इसके पीछे मुख्य कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदें और डॉलर की मजबूती हैं। इसके अलावा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी ने भी सोने की चमक कम कर दी है।


सोने में गिरावट के प्रमुख कारण

सोना आमतौर पर अनिश्चितता और महंगाई के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इसकी आकर्षकता कम हो जाती है क्योंकि यह कोई नियमित आय (जैसे ब्याज या डिविडेंड) नहीं देता।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इस समय बाजार अमेरिकी फेड द्वारा तीन बार ब्याज दर बढ़ाने की संभावना को पहले ही कीमतों में शामिल कर चुका है। सितंबर में दर वृद्धि की संभावना भी काफी मजबूत मानी जा रही है।


विशेषज्ञों की राय क्या कहती है?

ऑगमोंट (Augmont) की रिसर्च हेड डॉ. रेनीशा चैनानी के अनुसार, सोना लगातार चार हफ्तों से दबाव में है और साल 2026 की शुरुआत से अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगभग 30% तक गिर चुका है।

उनका कहना है कि इसके पीछे मुख्य वजहें हैं:

  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त नीति (Hawkish stance)
  • ऊंची महंगाई
  • मजबूत डॉलर

हालांकि, हाल ही में अमेरिका-ईरान तनाव के चलते सुरक्षित निवेश (safe haven demand) में थोड़ी बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता फिर बढ़ा दी, जिससे सोने की रिकवरी टिक नहीं पाई।

अब बाजार की नजरें अमेरिका के आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर हैं, खासकर:

  • नॉन-फार्म पेरोल्स रिपोर्ट
  • ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI

ये डेटा फेड के अगले फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।


क्या अभी सोना खरीदना सही रहेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, सोने में गिरावट के बाद खरीदारी का मौका बन सकता है, लेकिन यह पूरी तरह आने वाले आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगा।

अगर अमेरिकी लेबर मार्केट कमजोर होता है या महंगाई में नरमी आती है, तो सोना फिर से मजबूती पकड़ सकता है और यह $4,100–$4,150 के स्तर तक पहुंच सकता है।

वहीं अगर अमेरिका में रोजगार डेटा मजबूत रहता है, तो सोना एक बार फिर $4,000 के अहम सपोर्ट स्तर को टेस्ट कर सकता है।


सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार:

  • मजबूत सपोर्ट: $3,950 – $4,000
  • अगर यह टूटता है तो गिरावट $3,600 तक बढ़ सकती है
  • रेजिस्टेंस लेवल: $4,250 के आसपास

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

तेजी से आई इस गिरावट ने सोने को पहले की तुलना में अधिक आकर्षक जरूर बना दिया है, लेकिन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक एक साथ बड़ा निवेश करने से बचें।

इसके बजाय:

  • गोल्ड ETF में SIP के जरिए निवेश करें
  • सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) पर विचार करें
  • डिजिटल गोल्ड में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं

यह रणनीति बाजार की अस्थिरता का असर कम करने में मदद कर सकती है।


आगे सोने का रुख कैसा रहेगा?

सोने का भविष्य मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करेगा:

  1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति
  2. डॉलर की मजबूती
  3. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव

फिलहाल, कीमतों में आई यह बड़ी गिरावट निवेश का अवसर भी हो सकती है, लेकिन यह तय करना कि यह सबसे सही समय है या नहीं, आने वाले आर्थिक डेटा और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

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