पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र और राज्य के बीच एक अहम पहल देखने को मिली है। राज्य के वरिष्ठ नेता Suvendu Adhikari ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री J. P. Nadda के साथ वर्चुअल बैठक की, जिसमें राज्य की मेडिकल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस बैठक के बाद पश्चिम बंगाल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत लगभग 2103 करोड़ रुपये के फंड की मंजूरी दी गई है। इसके साथ ही राज्य में आयुष्मान भारत योजना को लागू करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है, जिसे जुलाई से शुरू करने की घोषणा की गई है।
आयुष्मान भारत से क्या बदलेगा?
अब तक पश्चिम बंगाल में इस योजना का पूरा लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा था, लेकिन नई घोषणा के बाद राज्य के पात्र नागरिकों को आयुष्मान भारत हेल्थ कार्ड जारी किए जाएंगे। इससे गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सरकारी और सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।
केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 976 करोड़ रुपये की सहायता राशि भी जारी की है, जिसमें से 500 करोड़ रुपये की पहली किस्त पहले ही जारी कर दी गई है। इससे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को गति मिलने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की योजना
बैठक में राज्य में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार, स्वीकृत पदों की तुलना में केवल लगभग 53 प्रतिशत डॉक्टर और नर्स ही वर्तमान में सेवाएं दे रहे हैं, जिससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है।
इसके अलावा पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर को लेकर भी चिंता जताई गई, जो कई जिलों में राष्ट्रीय औसत से अधिक पाई गई है।
नए मेडिकल कॉलेज और एम्स का प्रस्ताव
स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अलीपुरद्वार, कालिम्पोंग, दक्षिण दिनाजपुर और पश्चिम बर्धमान में नए मेडिकल कॉलेज खोलने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया है। इसके साथ ही उत्तर बंगाल में एक नया एम्स (AIIMS) स्थापित करने की भी योजना पर विचार किया जा रहा है।
जनऔषधि केंद्र और टीकाकरण अभियान
राज्य में सस्ती दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने के लिए 469 प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही 30 मई से सर्वाइकल कैंसर के खिलाफ एक व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा।
इन सभी योजनाओं के लागू होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े स्तर पर सुधार देखने को मिलेगा और आम लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।