संकट के दौर में सरकार को RBI का बड़ा सहारा, रिकॉर्ड रकम से बढ़ी राहत

Saroj kanwar
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मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को बड़ी राहत देते हुए रिकॉर्ड स्तर का सरप्लस ट्रांसफर करने का फैसला लिया है। इस कदम से सरकार की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

आरबीआई द्वारा सरकार को दी जाने वाली यह अतिरिक्त राशि ऐसे समय आई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से आर्थिक चुनौतियां बढ़ रही हैं। माना जा रहा है कि इस फंड ट्रांसफर से सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने और विकास योजनाओं को गति देने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, RBI की आय का मुख्य स्रोत विदेशी मुद्रा भंडार पर मिलने वाला रिटर्न, सरकारी बॉन्ड्स से कमाई और ब्याज आय होती है। केंद्रीय बैंक अपनी जरूरतों और रिजर्व को सुरक्षित रखने के बाद बची हुई राशि सरकार को ट्रांसफर करता है। इस बार यह रकम पिछले कई वर्षों के मुकाबले काफी अधिक बताई जा रही है।

सरकार के लिए यह रकम इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक योजनाओं और आर्थिक सुधारों पर बड़े खर्च की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में RBI से मिला यह सरप्लस सरकार के लिए आर्थिक सहारे का काम करेगा।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर वैश्विक तनाव और तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो भारत की महंगाई और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है। हालांकि, RBI का यह फैसला अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में सहायक साबित हो सकता है।

सरकार और RBI के इस तालमेल को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आने वाले महीनों में इसका असर सरकारी खर्च, निवेश और बाजार की धारणा पर भी देखने को मिल सकता है।

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