वाघा बॉर्डर बंद, फिर भी नहीं रुका भारत का अफगानिस्तान को निर्यात! दुबई के रास्ते हो रहा बड़ा कारोबार

Saroj kanwar
4 Min Read

भारत और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच होने वाले कारोबार में वाघा-अटारी सीमा मार्ग की अहम भूमिका रही है। साल 2019 से यह रास्ता बंद होने के बाद आधिकारिक आंकड़ों में भारत से अफगानिस्तान को होने वाले निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक स्थिति इससे अलग है, क्योंकि भारतीय सामान अब बड़े पैमाने पर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के जरिए अफगानिस्तान पहुंच रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों में क्यों दिख रही है गिरावट?

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022 में भारत का अफगानिस्तान को कुल निर्यात 4,129.04 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026 तक घटकर 2,239.11 करोड़ रुपये रह गया। दूसरी ओर, इसी अवधि में अफगानिस्तान से भारत का आयात 53.4 प्रतिशत बढ़कर 5,837.49 करोड़ रुपये पहुंच गया। पहली नजर में ये आंकड़े दोनों देशों के व्यापार में कमी का संकेत देते हैं, लेकिन इसके पीछे एक अलग तस्वीर भी सामने आ रही है।

यूएई के जरिए हो रहा है बड़ा कारोबार

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में “री-एक्सपोर्ट” एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसमें कोई देश दूसरे देश से सामान आयात करके उसे तीसरे देश को निर्यात करता है। यूएई इस मॉडल का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

यूएई के उपलब्ध व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2021 से 2024 के बीच वहां से अफगानिस्तान को होने वाले री-एक्सपोर्ट में दो गुना से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। इसी दौरान भारत और यूएई के बीच कुल व्यापार भी लगभग 5.44 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 8.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां बड़ी मात्रा में अपना माल पहले यूएई भेज रही हैं, जहां से वही सामान आगे अफगानिस्तान पहुंचाया जा रहा है। यही वजह है कि भारत के आधिकारिक निर्यात आंकड़ों में वास्तविक व्यापार पूरी तरह दिखाई नहीं देता।

चावल व्यापार से मिलते हैं संकेत

चावल के निर्यात के आंकड़े भी इस प्रवृत्ति की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2021 में भारत ने अफगानिस्तान को 108.92 करोड़ रुपये का चावल निर्यात किया था, लेकिन वित्त वर्ष 2023 में यह आंकड़ा लगभग शून्य पर पहुंच गया। बाद में वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर 23.93 करोड़ रुपये तक पहुंचा।

हालांकि, बासमती चावल निर्यातकों का कहना है कि अफगानिस्तान में भारतीय चावल की मांग कम नहीं हुई है। उनके अनुसार, भारतीय निर्यातक अब सीधे अफगानिस्तान भेजने के बजाय पहले दुबई के व्यापारियों को चावल की खेप भेजते हैं और वहां से वही माल अफगानिस्तान पहुंचाया जाता है। इस कारण आधिकारिक भारतीय निर्यात के आंकड़ों में यह व्यापार दर्ज नहीं हो पाता।

वाघा-अटारी मार्ग बंद होने के बाद बदला व्यापार का रास्ता

साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद पाकिस्तान ने अफगान ट्रांजिट रूट पर रोक लगा दी थी। इसके बाद भारत और अफगानिस्तान के बीच पारंपरिक व्यापारिक मार्ग लगभग बंद हो गया।

वहीं, वर्ष 2025 के अंत से पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय व्यापार समीकरणों को भी प्रभावित किया है। माना जा रहा है कि इन बदलते हालातों के बीच अफगानिस्तान नए व्यापारिक विकल्प तलाश रहा है और भारत के साथ अप्रत्यक्ष व्यापार में यूएई की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *