Lakhpati Bitiya Yojana: बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को मिलेगा आर्थिक सहारा, दिल्ली सरकार की नई पहल
दिल्ली सरकार ने बेटियों की शिक्षा, आर्थिक सुरक्षा और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘दिल्ली लखपति बिटिया योजना’ शुरू की है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। इसके तहत पात्र बालिकाओं को उनकी शिक्षा के विभिन्न चरणों में आर्थिक सहायता दी जाएगी, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
कौन उठा सकता है योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी शर्तें तय की गई हैं—
- बेटी का जन्म दिल्ली में हुआ हो।
- परिवार पिछले कम से कम तीन वर्षों से दिल्ली में रह रहा हो।
- परिवार की वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- बालिका दिल्ली के किसी सरकारी या मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान में पढ़ाई कर रही हो।
- एक परिवार की अधिकतम दो बेटियां ही योजना के लिए पात्र होंगी।
- बेटी की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले नहीं होनी चाहिए।
कब कराना होगा पंजीकरण?
योजना का लाभ पाने के लिए अलग-अलग शैक्षणिक चरणों पर पंजीकरण कराया जा सकेगा, जैसे—
- जन्म के एक वर्ष के भीतर
- निर्धारित कक्षाओं में प्रवेश के समय
- 10वीं के बाद पॉलिटेक्निक या आईटीआई में दाखिले पर
- 12वीं कक्षा में प्रवेश के दौरान
- ग्रेजुएशन या डिप्लोमा कोर्स में एडमिशन लेने पर
आवेदन कैसे करें?
इस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन किया जाएगा। इसके लिए सरकार एक विशेष पोर्टल उपलब्ध कराएगी। साथ ही, जिला कार्यालयों में हेल्प डेस्क भी बनाए जाएंगे, जहां आवेदन, पंजीकरण और शिकायतों से जुड़ी सहायता मिलेगी।
योजना के तहत कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता?
इस योजना के अंतर्गत सरकार बेटी के जन्म से लेकर ग्रेजुएशन या डिप्लोमा पूरा होने तक 56,000 से 61,000 रुपये किस्तों में निवेश करेगी। ब्याज जुड़ने के बाद, 18 या 21 वर्ष की आयु पूरी होने और शिक्षा सफलतापूर्वक पूरी करने पर यह राशि बढ़कर 1 लाख से 1.25 लाख रुपये तक पहुंच सकती है।
पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पूरी राशि सीधे लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में डिजिटल माध्यम से भेजी जाएगी। इसके अलावा, बाल देखभाल संस्थानों में रहने वाली अनाथ बेटियां भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगी।
योजना का उद्देश्य
दिल्ली सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को बेहतर शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना, बाल विवाह को रोकना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।