रिकॉर्ड हाई से 29% टूटा सोना! अभी खरीदारी का सही मौका या करें थोड़ा इंतजार? एक्सपर्ट की सलाह जानें

Saroj kanwar
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Gold Price Fall: अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का दौर लगातार जारी है। शुक्रवार, 26 जून को गोल्ड प्राइस में लगातार चौथे सप्ताह भी कमजोरी देखने को मिली। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की ओर से ब्याज दरें बढ़ाने के संकेत और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने सोने पर दबाव बढ़ा दिया है।

अगर आप सोने या चांदी में निवेश करते हैं या खरीदारी की योजना बना रहे हैं, तो यह समझना जरूरी है कि वैश्विक बाजार में आखिर ऐसा क्या हो रहा है, जिससे कीमती धातुओं की कीमतें लगातार नीचे आ रही हैं।

चौथे सप्ताह भी दबाव में रहा सोना

शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना (Spot Gold) 0.6% की गिरावट के साथ 4002.77 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, अगस्त डिलीवरी वाले अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 0.7% टूटकर 4017.30 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करते दिखाई दिए।

पूरे सप्ताह के दौरान सोने की कीमत में करीब 3.8% की गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की चिंता और बढ़ गई है।

रिकॉर्ड हाई से करीब 29% नीचे आया गोल्ड

इस वर्ष 29 जनवरी को वैश्विक तनाव और बढ़ती महंगाई के बीच सोने ने 5594.82 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई स्तर छुआ था। हालांकि, उस रिकॉर्ड स्तर से अब तक गोल्ड लगभग 29% तक टूट चुका है

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने में कमजोरी का दौर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। OANDA के सीनियर मार्केट एनालिस्ट केल्विन वोंग के अनुसार, लंबी अवधि में सोना 3400 डॉलर प्रति औंस तक भी फिसल सकता है।

आखिर क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?

सोने की कीमतों में कमजोरी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

1. अमेरिकी डॉलर लगातार मजबूत हो रहा है

फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मई 2025 के बाद अपने सबसे मजबूत स्तरों के करीब पहुंच गया है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है। इससे मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

2. महंगाई और ब्याज दरों का असर

अमेरिका में मई महीने की खुदरा महंगाई 4% के ऊपर पहुंच गई है, जो पिछले तीन वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है।

ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक उन एसेट्स की ओर रुख करते हैं, जहां उन्हें बेहतर रिटर्न मिलता है। चूंकि सोना कोई ब्याज या यील्ड नहीं देता, इसलिए इसकी मांग कम हो जाती है।

फिलहाल बाजार को उम्मीद है कि अमेरिकी फेड इस साल तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। सितंबर में रेट बढ़ने की संभावना लगभग 64% मानी जा रही है।

सिर्फ सोना ही नहीं, दूसरी कीमती धातुएं भी टूटीं

इस सप्ताह अन्य बहुमूल्य धातुओं में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

  • चांदी: 2.6% टूटकर 56.39 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।
  • प्लेटिनम: लगभग 2% गिरकर 1568.55 डॉलर प्रति औंस पर आ गया।
  • पैलेडियम: 0.6% की कमजोरी के साथ 1177.12 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखा।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

मौजूदा परिस्थितियों में विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिकी डॉलर मजबूत बना रहेगा और फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाए रखेगा, तब तक सोने की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय वैश्विक आर्थिक संकेतों और फेड की अगली नीति पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

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