दिल्ली सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। नई योजना के तहत अब राशन कार्ड धारकों को अनाज सब्सिडी पाने के लिए लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ेगा। सरकार लाभार्थियों को सीधे डिजिटल वॉलेट के माध्यम से सब्सिडी ट्रांसफर करने की तैयारी कर रही है, जो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) पर आधारित होगी।
डिजिटल वॉलेट से सीधे मिलेगी सब्सिडी
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने जानकारी दी है कि पात्र लाभार्थियों को एक सुरक्षित डिजिटल वॉलेट सिस्टम के जरिए डिजिटल मुद्रा भेजी जाएगी। इस रकम का उपयोग वे उचित मूल्य की दुकानों (FPS) से अनाज और अन्य जरूरी सामान खरीदने में कर सकेंगे।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर बताया कि CBDC आधारित इस व्यवस्था से राशन वितरण प्रणाली को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाया जाएगा। लाभार्थियों के मोबाइल फोन पर सीधे डिजिटल मुद्रा भेजी जाएगी, जिसे वे जरूरत के अनुसार उपयोग कर पाएंगे।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
CBDC यानी डिजिटल रुपया, असल मुद्रा का ही इलेक्ट्रॉनिक रूप है, जिसकी वैधता नकद रुपये के बराबर होती है। इस नई व्यवस्था में सरकार पहले पात्र लाभार्थी की सब्सिडी तय करेगी और फिर राशि सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में ट्रांसफर कर दी जाएगी।
इस प्रणाली का सबसे बड़ा फायदा यह है कि राशन वितरण में होने वाली गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जा सकेगी। हर लेन-देन डिजिटल रूप से रिकॉर्ड होगा, जिससे पूरी प्रक्रिया को आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा।
पात्रता नियमों में बदलाव और फर्जी कार्ड पर कार्रवाई
सरकार ने राशन योजना को और अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए वार्षिक आय सीमा को बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया है, जो पहले 1.2 लाख रुपये थी। इस बदलाव से अधिक जरूरतमंद परिवार योजना का लाभ ले सकेंगे।
इसके साथ ही विभाग ने करीब 2 लाख फर्जी राशन कार्ड रद्द किए हैं और नए पात्र लाभार्थियों के लिए आवेदन प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई है।
सरकार का दावा: ज्यादा परिवारों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, इस सुधार से लाखों नए परिवार राशन व्यवस्था से जुड़ पाएंगे। डिजिटल मुद्रा प्रणाली और बढ़ी हुई आय सीमा मिलकर दिल्ली की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाएंगे।
यह पहल सरकारी योजनाओं में डिजिटल तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने और लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।