राम मंदिर के चढ़ावे में चोरी का आरोप, सोना गायब होने पर मचा हड़कंप

Saroj kanwar
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Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। लखनऊ से लेकर अयोध्या तक इस मुद्दे ने हलचल मचा दी है। भक्तों में नाराज़गी और आक्रोश देखा जा रहा है। दान में हेराफेरी के आरोपों ने मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

इसी बीच एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को चौंका दिया है। अयोध्या से करीब 2000 किलोमीटर दूर केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में भगवान की मूर्तियों से सोने के आभूषण कथित रूप से गायब होने का मामला सुर्खियों में है।


सबरीमाला मंदिर सोना कांड क्या है?

सबरीमाला मंदिर में सामने आए इस मामले की जांच अब अदालत तक पहुंच चुकी है। केरल हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर सख्त रुख अपनाते हुए जांच एजेंसियों को आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

अदालत के आदेश के अनुसार, दो वामपंथी नेताओं और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया जाएगा। ये सभी अधिकारी 2023 से 2025 के बीच मंदिर प्रशासन से जुड़े पदों पर कार्यरत थे।


पहले भी दर्ज हो चुके हैं मामले

जांच एजेंसी (SIT) पहले ही इस मामले से जुड़े दो अन्य केस दर्ज कर चुकी है। इनमें CPI(M) के नेता और पूर्व विधायक ए. पद्मकुमार की गिरफ्तारी भी शामिल है।

ये घटनाएं उस कथित गड़बड़ी से जुड़ी हैं, जो 2019 में राज्य में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली पहली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आई थी।


गोल्ड प्लेटिंग के नाम पर मूर्तियों को भेजा गया चेन्नई

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबरीमाला मंदिर के द्वारपालक मूर्तियों पर पहली बार 1998 में सोने की परत चढ़ाई गई थी। इसके बाद 2019 में इन्हें दोबारा गोल्ड प्लेटिंग के लिए चेन्नई भेजा गया।

आरोप है कि जब मूर्तियां वापस आईं, तो उन पर चढ़े सोने का एक हिस्सा गायब था। जांच में यह भी सामने आया कि 2023 में फिर से इन्हीं मूर्तियों को “गोल्ड प्लेटिंग” के नाम पर चेन्नई भेजने की योजना बनाई गई थी।

कोर्ट का मानना है कि यह कदम पहले हुई कथित अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश हो सकता है।


हाईकोर्ट का सख्त रुख

केरल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामले में प्रथम दृष्टया आपराधिक साजिश, विश्वासघात और धोखाधड़ी के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर कोर्ट ने संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की प्रक्रिया मंदिर के ट्रस्ट को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है और इसकी गहन जांच जरूरी है।


जांच में और भी नाम आने की संभावना

जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे मामले में एक सुनार और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। आने वाले समय में और भी खुलासे हो सकते हैं।


दो अलग मामले, लेकिन उठे एक जैसे सवाल

हालांकि अयोध्या का राम मंदिर विवाद चढ़ावे की पारदर्शिता से जुड़ा है, जबकि सबरीमाला मामला मूर्तियों से सोना गायब होने के आरोपों से संबंधित है।

दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इनसे मंदिरों में दान, चढ़ावे और कीमती आभूषणों के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब सबकी नजरें अदालत और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि कथित गड़बड़ी के पीछे कौन जिम्मेदार है।

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