डायबिटीज केवल ब्लड शुगर बढ़ने तक सीमित बीमारी नहीं है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर शरीर के कई हिस्सों पर इसका असर पड़ सकता है। पैरों में दर्द, भारीपन, जलन, झनझनाहट और सुन्नपन डायबिटीज से जुड़ी आम समस्याओं में शामिल हैं। कुछ लोगों को ऐसा भी महसूस हो सकता है जैसे पैरों से गर्मी निकल रही हो।
पैरों की यह परेशानी धीरे-धीरे रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। दर्द के डर से व्यक्ति चलना-फिरना या एक्सरसाइज करना कम कर देता है, लेकिन लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि डायबिटीज में पैरों का दर्द किन कारणों से होता है और इससे राहत के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
इस विषय पर बेहतर जानकारी के लिए हमने Yashoda Hospitals, Hitech City, Hyderabad की Consultant Endocrinologist & Diabetologist Dr. Vidya Tickoo से बात की।
डायबिटीज में पैरों की समस्या के शुरुआती संकेत
डायबिटीज से जुड़ी पैरों की परेशानी कई तरह के लक्षणों के रूप में सामने आ सकती है। शुरुआती संकेतों में शामिल हैं:
- पैरों में झनझनाहट या सुन्नपन महसूस होना।
- पैरों में जलन या गर्माहट का एहसास होना।
- पैरों में दर्द, भारीपन या सूजन होना।
- चलने-फिरने में परेशानी होना।
- सीढ़ियां चढ़ते या उतरते समय पैरों में ज्यादा दर्द होना।
- थोड़ी दूरी चलने पर ही पैरों में तेज दर्द या क्रैम्प्स होना।
- पैरों पर घाव या अल्सर बनना और उनका देर से ठीक होना।
किन डायबिटिक मरीजों में पैरों की समस्या का खतरा अधिक होता है?
डायबिटीज से पीड़ित किसी भी व्यक्ति में नसों या पैरों से जुड़ी जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। हालांकि, कुछ लोगों में इसका जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
इनमें खासतौर पर वे लोग शामिल हैं:
- जिनका ब्लड शुगर लंबे समय से ज्यादा रहता है।
- जिन्हें लंबे समय से डायबिटीज है।
- जिनका वजन अधिक है।
- जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है।
- जिनका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है।
- 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोग।
डायबिटीज में पैरों में दर्द क्यों होता है?
डायबिटीज में पैरों के दर्द के पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण हो सकते हैं। डॉक्टर के मुताबिक प्रमुख कारण निम्न हैं।
1. डायबिटिक न्यूरोपैथी
डायबिटिक न्यूरोपैथी पैरों में दर्द और असामान्य सेंसेशन का एक प्रमुख कारण है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इसका असर खासतौर पर शरीर के दूर वाले हिस्सों की नसों पर पड़ सकता है।
नसों के प्रभावित होने पर पैरों में सेंसेशन कम हो सकता है। कुछ लोगों में इसके उलट नसों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है, जिससे जलन, चुभन या तेज दर्द महसूस हो सकता है।
मरीजों को पैरों में झनझनाहट, सुन्नपन या शार्प पेन की शिकायत भी हो सकती है। कई बार चलने या एक्सरसाइज के दौरान दर्द बढ़ जाता है। कुछ मरीजों को आराम करते समय या रात में लेटने के बाद भी पैरों में ज्यादा दर्द महसूस होता है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी कितनी आम है?
2023 में Diabetes Research and Clinical Practice में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों में डायबिटिक न्यूरोपैथी आम जटिलताओं में से एक है। समय के साथ करीब 50 प्रतिशत मरीजों में यह समस्या विकसित हो सकती है, जबकि लगभग 20 से 30 प्रतिशत मरीजों में नसों से जुड़ा दर्द देखा जा सकता है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी से अल्सर और इंफेक्शन का खतरा
नसों में सेंसेशन कम होने पर पैरों में लगी छोटी चोट या घाव का पता समय पर नहीं चल पाता। World Journal of Diabetes में प्रकाशित 2015 के एक अध्ययन के मुताबिक, डायबिटिक न्यूरोपैथी टाइप-1 और टाइप-2 दोनों तरह की डायबिटीज में हो सकती है।
पैरों की संवेदनशीलता कम होने के कारण चोट का इलाज देर से शुरू हो सकता है, जिससे अल्सर और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
2. पोटैशियम की कमी
लंबे समय से डायबिटीज रहने पर शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस प्रभावित हो सकता है। सोडियम, पोटैशियम और क्लोराइड जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स में असंतुलन होने पर पोटैशियम का स्तर कम हो सकता है।
पोटैशियम की कमी से पैरों में मांसपेशियों के खिंचाव और लेग क्रैम्प्स की समस्या हो सकती है। यह समस्या लंबे समय से डायबिटीज से जूझ रहे कुछ मरीजों में देखने को मिल सकती है।
3. पेरिफेरल आर्टरी डिजीज
पैरों में ब्लड सर्कुलेशन कम होना भी दर्द का एक कारण हो सकता है। डायबिटीज में ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित न रहने पर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। इससे पैरों तक पर्याप्त ऑक्सीजन और रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
पेरिफेरल आर्टरी डिजीज यानी PAD में चलने के दौरान पैरों में दर्द या क्रैम्प्स हो सकते हैं। कुछ मरीजों को थोड़ी दूरी चलने के बाद ही दर्द महसूस होने लगता है और रुकने पर राहत मिल सकती है।
4. पैरों के घाव में इंफेक्शन
डायबिटीज में ब्लड शुगर अधिक रहने पर शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में पैरों पर लगी चोट या बना हुआ घाव सामान्य व्यक्ति की तुलना में धीरे ठीक हो सकता है।
अगर घाव लंबे समय तक ठीक न हो, तो उसमें इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इंफेक्शन के कारण आसपास के टिश्यू और नसें प्रभावित हो सकती हैं और ब्लड सर्कुलेशन भी खराब हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप पैरों में दर्द और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं।
क्या मालिश या पेनकिलर से डायबिटीज का पैर दर्द ठीक हो जाता है?
पैरों में दर्द होने पर कई लोग तुरंत पेनकिलर, एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं या अन्य उपायों का सहारा लेते हैं। हालांकि, केवल दर्द कम हो जाना इसके मूल कारण का इलाज नहीं माना जा सकता।
इसी तरह मालिश करने से कुछ समय के लिए आराम मिल सकता है, लेकिन इससे डायबिटिक न्यूरोपैथी, खराब ब्लड सर्कुलेशन या किसी अन्य मूल समस्या का इलाज नहीं होता।
कुछ मामलों में डॉक्टर आराम करने, मोजे पहनने या नी-कैप इस्तेमाल करने की सलाह दे सकते हैं। ये उपाय भी लक्षणों में अस्थायी राहत दे सकते हैं। लगातार पैरों में दर्द होने पर इसके पीछे की वजह का पता लगाना ज्यादा जरूरी है।
डायबिटीज में पैरों का दर्द कम करने के लिए क्या करें?
डायबिटीज में पैरों की समस्या को मैनेज करने के लिए सबसे पहले ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना जरूरी है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखा जा सकता है:
ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करें
समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच कराएं। डॉक्टर की सलाह के अनुसार फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्ट-प्रैंडियल ब्लड शुगर और HbA1c की जांच करवाकर रिपोर्ट को रिकॉर्ड में रखें।
अगर ब्लड शुगर लगातार अनियंत्रित रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाओं या उनकी डोज में बदलाव कर सकते हैं।
नियमित शारीरिक गतिविधि रखें
पैरों में समस्या न होने पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित वॉक और हल्की एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। कुछ योगासन भी पैरों की मांसपेशियों और मूवमेंट को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, अगर किसी दिन पैरों में तेज दर्द, घाव या दूसरी परेशानी हो, तो दर्द को नजरअंदाज करके जबरदस्ती वॉक या एक्सरसाइज नहीं करनी चाहिए।
फिजियोथेरेपी मददगार हो सकती है
Dr. Vidya Tickoo के अनुसार, एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपी की मदद ली जा सकती है। इससे पैरों की मूवमेंट बेहतर करने और मांसपेशियों की कमजोरी को कम करने में सहायता मिल सकती है।
डायबिटीज में पैरों के दर्द के लिए डॉक्टर से कब मिलें?
पैरों की समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है:
- दर्द लगातार बढ़ रहा हो।
- आराम या सामान्य उपायों के बावजूद दर्द कम न हो।
- एक या दोनों पैरों में सूजन आ जाए।
- पैरों में लगातार जलन, सुन्नपन या झनझनाहट रहे।
- पैरों पर घाव या अल्सर बन जाए।
- घाव ठीक होने में असामान्य रूप से ज्यादा समय लगे।
- चलने पर बार-बार तेज दर्द या क्रैम्प्स हों।
लगातार पैरों में दर्द की वजह केवल डायबिटीज ही नहीं, बल्कि अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
निष्कर्ष
डायबिटीज के मरीजों में पैरों का दर्द, जलन, झनझनाहट और सुन्नपन को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डायबिटिक न्यूरोपैथी, पोटैशियम की कमी, पेरिफेरल आर्टरी डिजीज और पैरों के घाव में इंफेक्शन जैसी कई वजहों से यह समस्या हो सकती है।
मालिश, पेनकिलर, बाम या मोजे जैसे उपाय कुछ समय के लिए राहत दे सकते हैं, लेकिन इनसे पैरों की मूल समस्या का इलाज जरूरी नहीं होता। डायबिटीज को नियंत्रित रखना, नियमित रूप से ब्लड शुगर की निगरानी करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार फिजियोथेरेपी या एक्सरसाइज करना पैरों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।
अगर पैरों में लगातार दर्द, सूजन, सुन्नपन, जलन या घाव जैसी समस्या दिखाई दे, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें।