नई दिल्ली: देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद हालात और तनावपूर्ण होते नजर आ रहे हैं। मई महीने में ही सरकारी तेल कंपनियों ने चार बार ईंधन के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ पेट्रोल पंप डीलर्स पर भी भारी दबाव बढ़ गया है। डीलर्स ने अब हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।
राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेजकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है।
सप्लाई और क्रेडिट व्यवस्था पर उठे सवाल
डीलर्स का कहना है कि तेल कंपनियों की ओर से नियमित और मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो रही है। इसके अलावा, क्रेडिट पर ईंधन उपलब्ध कराने से इनकार किए जाने के कारण उनका व्यापार संचालन मुश्किल हो गया है।
एसोसिएशन का आरोप है कि कई बार शिकायतें दर्ज कराने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, जिससे स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
डिमांड और सप्लाई में असंतुलन से बढ़ी परेशानी
पेट्रोलियम डीलर्स का कहना है कि मौजूदा समय में डीजल की मांग, खासकर कृषि सीजन के दौरान, काफी बढ़ जाती है। ऐसे में सप्लाई बाधित होने से पेट्रोल पंपों पर स्टॉक जल्दी खत्म हो जाता है।
डीलर्स ने यह भी आरोप लगाया कि मेट्रोलॉजी विभाग के निरीक्षणों के चलते अतिरिक्त दबाव बन रहा है। कैलिब्रेशन और डेंसिटी जांच के नाम पर कार्रवाई की जा रही है, जबकि तेल कंपनियों या उपकरणों से जुड़ी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।
जुर्माने और आर्थिक दबाव से बढ़ी मुश्किलें
एसोसिएशन के अनुसार, विभागीय जांचों के दौरान छोटी-छोटी खामियों पर भी भारी जुर्माना लगाया जा रहा है, जिससे कारोबारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ रहा है। कई पेट्रोल पंपों पर सप्लाई में रुकावट के कारण बार-बार स्टॉक खत्म हो रहा है।
भुगतान अटका, वैट में कटौती की मांग
डीलर्स ने यह भी बताया कि सरकारी योजनाओं के तहत दी गई ईंधन आपूर्ति का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है, जिससे उनकी कार्यशील पूंजी प्रभावित हो रही है। साथ ही, राज्य में अवैध बायोफ्यूल और ईंधन में मिलावट की समस्या पर भी कार्रवाई न होने की शिकायत की गई है।
एसोसिएशन ने राज्य सरकार से पेट्रोल और डीजल पर वैट में कम से कम 5 प्रतिशत की कटौती की मांग की है। उनका कहना है कि राजस्थान में ईंधन की कीमतें पड़ोसी राज्यों दिल्ली, हरियाणा और पंजाब की तुलना में अधिक हैं, जिससे व्यापार पर असर पड़ रहा है।
1 जून से हड़ताल की चेतावनी
डीलर्स ने साफ कहा है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे 1 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। इससे राज्य में ईंधन आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।