लोकसभा में विपक्ष के नेता और रायबरेली से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने बुधवार (22 जुलाई 2026) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने राजनीतिक हलकों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी चर्चा छेड़ दी। नीट (NEET) समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के समर्थन में किए गए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई बातचीत का खुलासा किया।
हिरासत के समय पुलिसकर्मियों ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर आगे बढ़ा रही थी और इस दौरान उन्हें कुछ दूरी तक खींचकर भी ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि इसी दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके कान में ऐसी बातें कहीं, जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी।
राहुल गांधी के मुताबिक, एक पुलिसकर्मी ने उनसे कहा, “इस सरकार को हटाइए। मैं राजस्थान का हूं, हम सिर्फ वर्दी पहनकर अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।” वहीं, दूसरे पुलिसकर्मी ने कथित तौर पर खुद को हरियाणा का बताते हुए भी इसी तरह की बात कही। राहुल गांधी ने दावा किया कि यह भावनाएं अलग-अलग राज्यों के लोगों में देखने को मिल रही हैं।
पुलिसकर्मियों के प्रति जताई सहानुभूति
प्रेस वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि पुलिसकर्मी अपने स्तर पर निर्णय नहीं ले सकते, क्योंकि उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कई पुलिसकर्मी भी छात्रों के साथ हुई घटनाओं से संतुष्ट नहीं हैं और उन्हें लगता है कि देश के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय हुआ है।
राहुल गांधी ने यह भी कहा कि समझदार पुलिसकर्मी इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहे हैं और उन्हें छात्रों में अपने ही बच्चों की झलक दिखाई देती है।
छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस का सरकार पर हमला
राहुल गांधी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब कांग्रेस लगातार पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर ले रही है। पार्टी शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के साथ-साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहरा रही है।
‘मुद्दा सिर्फ मेरा नहीं, युवाओं का भविष्य है’
राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल उनके साथ हुए व्यवहार या विपक्षी नेताओं तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, सबसे अहम सवाल देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं के भविष्य का है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।