Agra Damp Wall Solution: उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शहर आगरा अपनी सांस्कृतिक विरासत और ताजमहल के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। हालांकि, यहां रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी परेशानी घरों की दीवारों में आने वाली सीलन भी है। यमुना नदी के किनारे बसे होने के कारण शहर के कई इलाकों में नमी अधिक रहती है, जिससे दीवारों पर सीलन, पपड़ी निकलना और दरारें पड़ना आम बात हो गई है।
ऐसी स्थिति में लोगों को हर कुछ महीनों के अंतराल पर दोबारा डेंटिंग और पेंटिंग करवानी पड़ती है, जिससे खर्च भी बढ़ जाता है। अब आगरा के एक अनुभवी कारीगर ने इस समस्या का ऐसा समाधान बताया है, जिससे लंबे समय तक राहत मिलने का दावा किया जा रहा है।
25 साल के अनुभव से निकाला समाधान
आगरा के दहतोड़ा क्षेत्र के रहने वाले नरेश राजपूत पिछले करीब 25 वर्षों से घरों में डेंट-पेंट और दीवारों की मरम्मत का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने शहर के लगभग हर इलाके में काम किया है और अधिकतर घरों में सीलन की समस्या देखी है।
नरेश के मुताबिक, केवल पुराने मकान ही नहीं बल्कि नए बने घरों की दीवारों में भी नमी के कारण पपड़ी उतरने और दरारें आने की शिकायतें बढ़ रही हैं। इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने एक ऐसा तरीका अपनाया, जिससे बार-बार पेंट कराने की जरूरत काफी हद तक कम हो सकती है।
पुट्टी और POP की जगह अपनाएं लेवल प्लास्टर
कारीगर नरेश राजपूत का कहना है कि यदि दीवारों पर सामान्य पुट्टी या POP लगाने की बजाय लेवल प्लास्टर कराया जाए, तो दीवार अधिक मजबूत बन जाती है।
उनके अनुसार, यह प्लास्टर दीवार से मजबूती से चिपकता है और उस पर जल्दी सीलन का असर नहीं होता। इसकी वजह से दीवारों की सतह लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और बार-बार रिपेयरिंग कराने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
2 से 3 साल तक मिल सकती है राहत
नरेश का दावा है कि एक बार सही तरीके से लेवल प्लास्टर कराने के बाद करीब 2 से 3 वर्षों तक दीवारों में सीलन की समस्या काफी हद तक नियंत्रित रह सकती है।
इसके अलावा, यदि दीवारों में छोटी-मोटी दरारें हैं तो उन्हें भी इसी प्रक्रिया के दौरान भर दिया जाता है, जिससे पूरी दीवार पहले की तुलना में ज्यादा मजबूत हो जाती है।
बिना तोड़-फोड़ के भी हो सकती है मरम्मत
कारीगर के अनुसार, यदि किसी दीवार में दरार या कमजोर हिस्सा दिखाई देता है, तो पूरी दीवार तोड़ने की जरूरत नहीं होती। पहले हथौड़े की मदद से ढीले हिस्से को सावधानीपूर्वक हटाया जाता है और फिर वहां लेवल प्लास्टर भर दिया जाता है।
इस प्रक्रिया से प्लास्टर सीमेंट और ईंट के बीच मजबूत पकड़ बना लेता है, जिससे दीवार की मजबूती बढ़ जाती है और अतिरिक्त निर्माण कार्य की आवश्यकता नहीं पड़ती।
कम खर्च में टिकाऊ विकल्प
नरेश राजपूत का कहना है कि बार-बार डेंटिंग और पेंटिंग करवाने की तुलना में लेवल प्लास्टर करवाना अधिक किफायती साबित हो सकता है। उनका दावा है कि जिन घरों में उन्होंने इस तकनीक का उपयोग किया है, वहां से अब तक किसी तरह की शिकायत नहीं मिली है।
उनके अनुसार, यह तरीका न केवल सीलन से राहत दिलाने में मदद करता है बल्कि दीवारों को लंबे समय तक मजबूत और सुरक्षित बनाए रखने का भी एक प्रभावी विकल्प है।
नोट: यह जानकारी आगरा के एक स्थानीय कारीगर के अनुभव और दावों पर आधारित है। किसी भी निर्माण या मरम्मत कार्य से पहले योग्य सिविल इंजीनियर या भवन विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।