भारतीय रुपया हाल के दिनों में दबाव के बाद थोड़ा मजबूत हुआ है और 1 डॉलर के मुकाबले करीब ₹95.26 पर आ गया है। पहले यह ₹96.90 (रिकॉर्ड निचला स्तर) तक गिर गया था।
रुपये में सुधार क्यों हुआ?
- अमेरिका-ईरान तनाव कम होने की उम्मीद
इससे कच्चे तेल की कीमतें घटने लगीं। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल सस्ता होने से डॉलर की मांग कम हुई और रुपये को सहारा मिला। - RBI का संकेत और दखल
Reserve Bank of India के गवर्नर Sanjay Malhotra ने कहा कि रुपया जरूरत से ज्यादा कमजोर हो गया था और RBI बाजार में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए कदम उठाएगा। - RBI की डॉलर बिक्री और मजबूत विदेशी भंडार
RBI के पास करीब $700 अरब का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे वह जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचकर रुपये को सपोर्ट कर सकता है।
RBI का बड़ा अपडेट
- सरकार को FY 2025-26 के लिए ₹2.87 लाख करोड़ सरप्लस ट्रांसफर मिलेगा।
- लेकिन RBI ने ₹1.09 लाख करोड़ का बड़ा जोखिम बफर अलग रखा है ताकि भविष्य के झटकों से निपटा जा सके।
आम लोगों पर असर
अगर रुपया मजबूत रहता है और तेल सस्ता होता है तो:
- पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है
- महंगाई थोड़ी कम हो सकती है
- आयातित सामान सस्ता हो सकता है
आगे क्या तय करेगा रुपया?
- अमेरिका-ईरान संबंध
- कच्चे तेल की कीमतें
- RBI की आगे की नीतियां