सरकार ने पासपोर्ट धारकों के लिए एक बड़ी डिजिटल सुविधा की शुरुआत की है। अब नागरिक अपने Passport Verification Records (PVR) को सीधे DigiLocker के माध्यम से ऑनलाइन देख और सुरक्षित रूप से एक्सेस कर सकेंगे। यह पहल इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), विदेश मंत्रालय (MEA) और नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के संयुक्त सहयोग से शुरू की गई है।
अब कहीं भी, कभी भी मिल सकेगा पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड
इस नई सुविधा के तहत DigiLocker उपयोगकर्ता अपने पासपोर्ट से जुड़े वेरिफिकेशन रिकॉर्ड को कभी भी और कहीं से भी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों की फिजिकल दस्तावेजों पर निर्भरता को कम करना और पासपोर्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सरल व डिजिटल बनाना है।
अब पासपोर्ट बनवाने या रिन्यू कराने के दौरान वेरिफिकेशन प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बनाने में भी यह फीचर मदद करेगा।
सरकारी सेवाओं में पेपरलेस सिस्टम की ओर बड़ा कदम
अधिकारियों के अनुसार, DigiLocker में PVR को शामिल करना डिजिटल गवर्नेंस और पेपरलेस सिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे दस्तावेजों की फिजिकल कॉपी की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
RPO पटना के अनुसार, नागरिक DigiLocker के जरिए अपने जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रूप से साझा कर सकते हैं, जिससे पासपोर्ट सेवाओं की प्रक्रिया और भी तेज व सरल हो जाती है।
पहले से मौजूद कई दस्तावेज अब और उपयोगी
DigiLocker पहले से ही कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को स्टोर और एक्सेस करने की सुविधा देता है, जैसे कि:
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- ड्राइविंग लाइसेंस
- वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
- शैक्षणिक प्रमाण पत्र
अब इसमें पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड जुड़ने से यह प्लेटफॉर्म एक ऑल-इन-वन डिजिटल डॉक्यूमेंट हब के रूप में और मजबूत हो गया है।
मोबाइल और वेब दोनों पर उपलब्ध सुविधा
नई अपडेट के अनुसार, यूजर्स अब DigiLocker के वेब वर्जन को मोबाइल और डेस्कटॉप दोनों पर इस्तेमाल करके अपना PVR देख सकते हैं। यह डिजिटल दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित है और इसे जरूरत पड़ने पर अधिकृत संस्थानों के साथ साझा किया जा सकता है।
यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जिन्हें नौकरी, वीजा आवेदन, पुलिस वेरिफिकेशन या अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं के दौरान दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं।
शुरुआती स्तर पर कुछ तकनीकी समस्याएं
हालांकि, शुरुआती उपयोगकर्ताओं की प्रतिक्रिया में कुछ समस्याएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों ने नाम या जानकारी में त्रुटि और रिकॉर्ड उपलब्ध होने में देरी की शिकायत की है। सरकार की ओर से बताया गया है कि इन तकनीकी समस्याओं को जल्द ही ठीक किया जा रहा है और सिस्टम को पूरी तरह स्थिर बनाने का काम जारी है।
निष्कर्ष
DigiLocker में पासपोर्ट वेरिफिकेशन रिकॉर्ड्स की सुविधा जोड़ना डिजिटल इंडिया मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे नागरिकों को न केवल दस्तावेजों की आसान उपलब्धता मिलेगी, बल्कि सरकारी प्रक्रियाएं भी पहले से ज्यादा तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बनेंगी।