ट्रंप-शी बैठक में बढ़ा तनाव, बीजिंग में क्यों भड़के चीन के राष्ट्रपति?

Saroj kanwar
3 Min Read

बीजिंग में हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच हुए दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में उस समय माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया, जब जापान और ताइवान का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक के दौरान शी जिनपिंग अचानक काफी आक्रामक हो गए और उन्होंने जापान की नई सैन्य रणनीति पर तीखी नाराजगी जताई। खास बात यह रही कि यह मुद्दा पहले से तय एजेंडे का हिस्सा भी नहीं था, इसलिए अमेरिकी अधिकारियों के लिए यह प्रतिक्रिया चौंकाने वाली रही।

जापान की नीति से क्यों भड़का चीन?

दरअसल, जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi के नेतृत्व में टोक्यो ने अपनी सुरक्षा और रक्षा नीति में बड़े बदलाव किए हैं। चीन को सबसे ज्यादा चिंता जापान के बढ़ते सैन्य विस्तार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी सक्रियता से है।

चीन की नाराजगी के पीछे ये बड़े कारण बताए जा रहे हैं:

  • जापान ने अपने रक्षा बजट को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया है।
  • हथियारों के निर्यात पर लगी पुरानी पाबंदियों में ढील दी गई है।
  • ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों के साथ सैन्य साझेदारी मजबूत की जा रही है।
  • ताइवान की सुरक्षा को लेकर जापान खुलकर चीन के खिलाफ रुख अपना रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, शी जिनपिंग ने बैठक में कहा कि जापान का यह रवैया एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा सकता है और चीन इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरे के तौर पर देखता है।

ट्रंप ने जापान का किया बचाव

शी जिनपिंग की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने जापान का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जापान को अपनी सुरक्षा नीति मजबूत करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, क्योंकि उत्तर कोरिया और क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ रहे हैं।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, ट्रंप ने बैठक में जापानी लोगों के प्रति सम्मान जताते हुए कहा कि अमेरिका जापान की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जापान में अमेरिकी सेना की बड़ी मौजूदगी है और वॉशिंगटन अपने सहयोगियों के साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।

ताइवान बना सबसे बड़ा विवाद

बैठक के दौरान सबसे संवेदनशील मुद्दा ताइवान को लेकर रहा। पिछले साल जापानी पीएम सनाए ताकाइची ने संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान अपनी सेना का इस्तेमाल कर सकता है।

चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और किसी भी बाहरी समर्थन को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मानता है। ऐसे में जापान का खुला समर्थन बीजिंग को लगातार नाराज कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका, जापान और ताइवान के बढ़ते रणनीतिक संबंध आने वाले समय में एशिया की भू-राजनीति को और अधिक तनावपूर्ण बना सकते हैं।

TAGGED:
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *