इस्लामाबाद: पाकिस्तान इस समय गंभीर सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। बलूचिस्तान में सक्रिय विद्रोही संगठनों के लगातार हमलों ने पाकिस्तानी सेना और सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खासतौर पर चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर बढ़ते हमलों ने इस्लामाबाद की चिंताओं को और गहरा कर दिया है। ऐसे हालात में पाकिस्तानी सेना एक बार फिर अपनी आंतरिक नाकामियों का ठीकरा भारत पर फोड़ती नजर आ रही है।
बलूचिस्तान में बढ़ती चुनौतियों से परेशान पाकिस्तानी सेना
हाल ही में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा सुरक्षाबलों को ले जा रही जफर एक्सप्रेस को निशाना बनाए जाने की घटना ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। इस हमले के बाद पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईद-उल-अजहा के मौके पर झोब और क्वेटा पहुंचे और वहां तैनात सैनिकों से मुलाकात की।
हालांकि, सुरक्षा तंत्र की कमियों पर चर्चा करने या विद्रोहियों के खिलाफ नई रणनीति पेश करने के बजाय उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को विदेशी साजिश करार दिया। पाकिस्तान के राजनीतिक और सुरक्षा हलकों में इसे सेना की पुरानी रणनीति माना जा रहा है, जिसमें घरेलू असफलताओं से ध्यान हटाने के लिए बाहरी ताकतों पर आरोप लगाए जाते हैं।
‘फितना-अल-हिंदुस्तान’ के जरिए नया नैरेटिव बनाने की कोशिश
पाकिस्तानी सेना ने हाल के महीनों में ‘फितना-अल-हिंदुस्तान’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह एक ऐसा नैरेटिव तैयार करने की कोशिश है, जिसके जरिए देश के भीतर बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सुरक्षा विफलताओं से जनता का ध्यान हटाया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब भी पाकिस्तान में आतंरिक सुरक्षा हालात खराब होते हैं, तब सेना अक्सर भारत का नाम लेकर जनता के बीच राष्ट्रवाद का माहौल बनाने की कोशिश करती है। इस बार भी बलूचिस्तान में बढ़ते हमलों और सेना की कमजोर पकड़ के बीच यही रणनीति अपनाई जा रही है।
CPEC की सुरक्षा को लेकर चीन का बढ़ता दबाव
बलूचिस्तान में लगातार हो रहे हमलों से चीन भी बेहद चिंतित बताया जा रहा है। चीन ने पाकिस्तान में अरबों डॉलर का निवेश CPEC प्रोजेक्ट्स के जरिए किया है, लेकिन वहां काम कर रहे चीनी इंजीनियरों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बीजिंग की नाराजगी लगातार बढ़ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, ग्वादर समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रोजेक्ट्स की रफ्तार प्रभावित हुई है। चीन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उसके नागरिकों और निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो भविष्य की फंडिंग पर असर पड़ सकता है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह बेहद गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।
आसिम मुनीर की बढ़ती ताकत, लेकिन कमजोर होती जमीनी स्थिति
पाकिस्तान में सेना प्रमुख आसिम मुनीर की शक्तियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने सत्ता और सैन्य नियंत्रण को अपने हाथों में और मजबूत किया है। लेकिन दूसरी तरफ बलूचिस्तान में हालात सेना के नियंत्रण से बाहर होते नजर आ रहे हैं।
खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में तैनात पाकिस्तानी सैनिकों का मनोबल कमजोर हुआ है। लगातार हमलों और कठिन हालात के कारण सेना पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि बलूचिस्तान में बिगड़ती स्थिति पाकिस्तान के लिए लंबे समय तक चुनौती बनी रह सकती है।
पाकिस्तान के सामने बढ़ती मुश्किलें
एक ओर आर्थिक संकट, दूसरी ओर बलूचिस्तान में अस्थिरता और ऊपर से चीन का दबाव—इन सभी चुनौतियों ने पाकिस्तान सरकार और सेना की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में भारत पर आरोप लगाने की रणनीति भले ही घरेलू राजनीति में कुछ समय के लिए माहौल बदल दे, लेकिन इससे जमीन पर मौजूद सुरक्षा और राजनीतिक समस्याओं का समाधान निकलता नजर नहीं आता