फरीदाबाद: घर का मंदिर केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं माना जाता, बल्कि इसे सकारात्मक ऊर्जा और पारिवारिक सुख-शांति का केंद्र भी कहा जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मंदिर में रखी गई मूर्तियां घर के वातावरण पर गहरा प्रभाव डालती हैं। कई बार लोग अनजाने में ऐसी प्रतिमाएं रख लेते हैं, जिनसे घर में तनाव, अशांति और नकारात्मकता बढ़ने लगती है। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि घर के मंदिर में कौन-सी मूर्तियां शुभ मानी जाती हैं और किन्हें रखने से बचना चाहिए।
फरीदाबाद के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, घर में एक ही भगवान की कई मूर्तियां या शिवलिंग नहीं रखने चाहिए। अक्सर लोग अलग-अलग तीर्थ स्थलों से शिवलिंग या प्रतिमाएं लाकर मंदिर में रख देते हैं, जैसे रामेश्वरम, काशी विश्वनाथ या केदारनाथ से लाए गए शिवलिंग। वास्तु के मुताबिक ऐसा करना उचित नहीं माना जाता। घर के मंदिर में केवल एक शिवलिंग रखकर नियमित पूजा करना बेहतर होता है।
उन्होंने बताया कि भगवान गणेश की शांत मुद्रा वाली प्रतिमा घर के लिए शुभ मानी जाती है। मोदक खाते हुए गणेश जी की मूर्ति सकारात्मकता का प्रतीक होती है, लेकिन नृत्य करते हुए या एक पैर पर खड़े गणेश जी की प्रतिमा घर में नहीं रखनी चाहिए। इसी तरह भगवान शिव के उग्र स्वरूप, जैसे महाकाल की प्रतिमा, घर के वातावरण के लिए सही नहीं मानी जाती। भैरव बाबा, काली माता के रौद्र रूप, शनि देव और राहु-केतु की उग्र प्रतिमाओं को भी घर के मंदिर में रखने से बचने की सलाह दी जाती है।
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य का कहना है कि यदि घर में मां दुर्गा की प्रतिमा रखी जाए तो इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि उनके वाहन शेर का मुंह बंद हो। मंदिरों में शेर का खुला मुंह नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने का प्रतीक माना जाता है, क्योंकि वहां विभिन्न प्रकार के लोग आते हैं। वहीं घर में परिवार के सदस्यों के बीच शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए बंद मुंह वाला शेर शुभ माना जाता है।
वास्तु शास्त्र में घर के मंदिर में बहुत बड़ी मूर्तियां रखने की भी मनाही बताई गई है। मान्यता है कि मूर्तियों का आकार लगभग 6 इंच तक होना चाहिए। यदि शिवलिंग रखा जाए तो वह अंगूठे के आकार से बड़ा नहीं होना चाहिए। बड़ी प्रतिमाएं घर के मंदिर की बजाय बड़े धार्मिक स्थलों के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
इसके अलावा शालिग्राम भगवान की पूजा करने वालों को भी एक ही शालिग्राम रखने की सलाह दी जाती है। कई लोग एक से अधिक शालिग्राम रखते हैं, लेकिन वास्तु के अनुसार एक ही पर्याप्त माना जाता है। वहीं प्लास्टिक या आर्टिफिशियल मूर्तियों को मंदिर में रखना शुभ नहीं माना जाता। मिट्टी, पीतल, चांदी या सोने से बनी प्रतिमाएं अधिक पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा देने वाली मानी जाती हैं।
मान्यता है कि सही नियमों के अनुसार घर के मंदिर की व्यवस्था करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।