किसान मानधन योजना: सरकारी कर्मचारियों की तरह अब किसान भी 60 वर्ष की आयु के बाद मासिक पेंशन प्राप्त कर सकते हैं। अक्सर देखा जाता है कि बढ़ती उम्र के साथ किसान खेती करने में शारीरिक रूप से असमर्थ हो जाते हैं, जिससे उनकी आय का स्रोत समाप्त हो जाता है। इस समस्या के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना शुरू की है, ताकि किसानों को वृद्धावस्था में आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
वर्ष 2019 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य उन छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है जिनके पास आजीविका के अन्य साधन नहीं हैं। इस योजना के तहत 18 से 40 वर्ष की आयु के बीच का कोई भी किसान पीएम मानधन योजना के लिए पंजीकरण करा सकता है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें निवेश की राशि बहुत कम है, जो एक दिन के खाने-पीने के खर्च से भी कम है। पीएम किसान मानधन योजना एक पेंशन योजना है। इस योजना में निवेश की शुरुआत 55 रुपये प्रति माह से होती है, जो अधिकतम 200 रुपये तक हो सकता है। यदि कोई किसान 18 वर्ष की आयु में इस योजना में शामिल होता है, तो उसे केवल 55 रुपये का प्रीमियम देना होगा, जिससे उसके बजट पर कोई बोझ नहीं पड़ेगा।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना की एक और सराहनीय विशेषता यह है कि यह “मिलान अंशदान” के सिद्धांत पर आधारित है। इसका अर्थ है कि केंद्र सरकार किसान के पेंशन कोष में उसके द्वारा जमा किए गए प्रीमियम के बराबर राशि का योगदान करती है। उदाहरण के लिए, यदि आपका मासिक प्रीमियम 100 रुपये है, तो सरकार भी 100 रुपये का योगदान करेगी।
यह लाभ केवल किसान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसके परिवार, विशेष रूप से उसकी पत्नी को भी सुरक्षा प्रदान करता है। यदि लाभार्थी किसान का किसी भी कारण से निधन हो जाता है, तो उसकी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के रूप में पेंशन का 50 प्रतिशत, यानी 1,500 रुपये प्रति माह मिलता रहेगा। 18 से 40 वर्ष की आयु के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उनके पास 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि नहीं होनी चाहिए। यदि कोई किसान पहले से ही किसी अन्य सरकारी पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजना, जैसे कि ईपीएफओ, एनपीएस या ईएसआईसी का सदस्य है, तो वह इस योजना का लाभ नहीं उठा सकता है।
किसान अपने नजदीकी साझा सेवा केंद्र (सीएससी) पर जाकर प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के लिए किसानों को अपना पहचान पत्र, बैंक पासबुक और जमीन संबंधी दस्तावेजों की एक प्रति, जैसे कि खसरा खाताउनी, साथ लाना होगा। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-किसान) किसानों के आत्मसम्मान और गरिमापूर्ण जीवन की राह में एक नया अध्याय है। इस योजना के माध्यम से किसान अब बुढ़ापे की चिंताओं से मुक्त होकर खेती पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। आज की 55 रुपये की छोटी सी बचत भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति बन सकती है, जिससे किसानों को भीख मांगने की जरूरत नहीं पड़ेगी।