टीकमगढ़ के किसान ने जैविक खेती से बदली तस्वीर, अब 2500 किसानों को दिखा रहे रास्ता

Saroj kanwar
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Tikamgarh News: टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव खुर्द निवासी मुत्रीलाल यादव ने खेती की पारंपरिक शैली को छोड़कर जैविक खेती की राह अपनाई और अब 2500 से ज्यादा किसानों को भी इसी दिशा में प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने सबसे पहले खुद एक एकड़ जमीन में जैविक पद्धति से खेती की शुरुआत की। रसायनों से पैदा होने वाले अनाज से होने वाले स्वास्थ्य नुकसानों को देखते हुए उन्होंने यह निर्णय लिया।

घर की जरूरत के गेहूं, तिली, सरसों, मूंगफली, उड़द, दूध और घी तक सब कुछ खेत और अपने देशी गायों से ही प्राप्त करते हैं। खासकर कोरोना काल के दौरान, जब शहरों में लॉकडाउन था, तब गांव लौटकर उन्होंने खेती की यह नई दिशा अपनाई। जैविक खेती से जहां लागत घटी, वहीं फसल की गुणवत्ता भी बेहतर मिली।

मुत्रीलाल ने बताया कि एक एकड़ खेत में जहां रसायनिक खेती में करीब 3500 रुपए खर्च होते थे, वहीं जैविक खेती में घर में तैयार जीवामृत से लागत न के बराबर रही। गेहूं का उत्पादन भी 12 क्विंटल तक मिला।अब वे पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च से जुड़कर बल्देवगढ़, जतारा, पलेरा और टीकमगढ़ के 2500 किसानों को जैविक खेती के लिए तैयार कर चुके हैं।

इन किसानों द्वारा लगभग 2000 हेक्टेयर में खेती की जाएगी। सभी किसानों को एमपी किसान पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है और शासन द्वारा प्रति हेक्टेयर 5000 रुपए अनुदान भी मिलेगा। जैविक खेती को बढ़ावा देने का यह प्रयास स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए लाभदायक है।

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