Shiksha Mitra Salary Hike – उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों के लिए एक अहम खबर सामने आई है, लेकिन यह खबर सुनकर खुशी से ज्यादा निराशा हाथ लगी है। राज्य के करीब डेढ़ लाख शिक्षामित्र लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी का इंतज़ार कर रहे थे। कई बार इस मामले को उठाया गया, धरना-प्रदर्शन हुए, मांग पत्र दिए गए और आश्वासन भी मिले, लेकिन अब विधानसभा के द्वितीय सत्र 2025 में सरकार द्वारा दिए गए लिखित जवाब ने स्थिति को साफ कर दिया है। इसमें कहा गया है कि फिलहाल न तो शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाया जाएगा और न ही उन्हें स्थाई किया जाएगा। साथ ही समान कार्य-समान वेतन की मांग को भी खारिज कर दिया गया है।
सालों से चल रही मांग, लेकिन नतीजा शून्य
शिक्षामित्रों का संघर्ष कोई दो-चार महीने पुराना नहीं है, बल्कि यह सालों से चलता आ रहा है। शुरुआत में उन्हें उम्मीद थी कि जैसे-जैसे समय बीतेगा, उनका मानदेय भी बढ़ेगा और उन्हें स्थाई करने की दिशा में सरकार कदम उठाएगी। पहले भी सरकार की तरफ से कुछ मौकों पर आश्वासन दिए गए, लेकिन वह सिर्फ कागजों और बयानों तक ही सीमित रह गए।
कई शिक्षामित्रों ने अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन करके अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अब तक उनकी मेहनत का परिणाम सामने नहीं आया। इस बीच महंगाई लगातार बढ़ रही है और ₹10,000 महीना मानदेय में घर का खर्च चलाना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।
विधानसभा में उठा मुद्दा
उत्तर प्रदेश विधानसभा के द्वितीय सत्र 2025 में विधायक नाहिद हसन ने यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने सीधे सवाल किया कि क्या सरकार शिक्षामित्रों को सहायक शिक्षकों के समान वेतन देने या उन्हें स्थाई करने की योजना बना रही है? उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर इतने लंबे समय से उनकी मानदेय बढ़ोतरी की मांग क्यों नहीं सुनी जा रही है।
इस सवाल का जवाब शिक्षा मंत्री ने लिखित में दिया और यह जवाब सुनकर कई लोगों की उम्मीदें टूट गईं।
सरकार का लिखित जवाब – बढ़ोतरी और स्थाईकरण पर फिलहाल ‘ना’
सरकार ने अपने जवाब में कहा कि इस समय शिक्षामित्रों का स्थाईकरण करना संभव नहीं है, क्योंकि उनकी नियुक्ति शिक्षा समिति द्वारा केवल 11 महीने के संविदा आधार पर होती है। वहीं, सहायक शिक्षकों की नियुक्ति स्थाई पद पर की जाती है और उनकी योग्यता व नियुक्ति प्रक्रिया अलग होती है।
समान कार्य-समान वेतन के सवाल पर भी सरकार ने यही तर्क दिया कि दोनों पदों की पात्रता, चयन प्रक्रिया और जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं, इसलिए दोनों का वेतन समान नहीं हो सकता। वर्तमान में शिक्षामित्रों को ₹10,000 प्रति माह मानदेय दिया जा रहा है और इसे बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
समान कार्य-समान वेतन पर भी निराशा
शिक्षामित्रों की सबसे बड़ी मांगों में से एक थी समान कार्य-समान वेतन। उनका कहना है कि वे भी बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं, क्लास लेते हैं और शिक्षा व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाते हैं, इसलिए उन्हें भी स्थाई शिक्षकों के बराबर वेतन मिलना चाहिए। लेकिन सरकार ने साफ कर दिया कि नियुक्ति प्रक्रिया और पद की प्रकृति में अंतर होने के कारण यह संभव नहीं है। इससे शिक्षामित्रों के बीच मायूसी का माहौल बन गया है, क्योंकि यह मांग लंबे समय से उनके संघर्ष का हिस्सा रही है।
गुजारे में हो रही मुश्किल
₹10,000 के मानदेय में आज के समय में घर का खर्च निकालना बेहद कठिन है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां नौकरी के अन्य अवसर कम हैं, वहां शिक्षामित्र इस मानदेय पर पूरी तरह निर्भर हैं। महंगाई बढ़ने से रोजमर्रा का सामान, बच्चों की पढ़ाई, बिजली-पानी के बिल, इलाज और अन्य खर्च पूरे करना बेहद मुश्किल हो गया है।
कई शिक्षामित्र बताते हैं कि पहले मानदेय कम था तो भी उम्मीद थी कि आगे चलकर यह बढ़ेगा, लेकिन अब जब सरकार ने खुद साफ कर दिया कि फिलहाल ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाएगा, तो उनकी हिम्मत टूटने लगी है।
आगे की संभावना – अभी दूर की बात
हालांकि सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा कि भविष्य में परिस्थितियों के आधार पर इस मुद्दे पर विचार किया जा सकता है, लेकिन यह भी साफ है कि यह फिलहाल प्राथमिकता में नहीं है। यानी निकट भविष्य में मानदेय बढ़ने या स्थाई करने की संभावना बेहद कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल या बड़े आंदोलनों की स्थिति में ही सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठा सकती है, वरना फिलहाल शिक्षामित्रों को वर्तमान मानदेय पर ही काम करना पड़ेगा।
शिक्षामित्रों में बढ़ता आक्रोश
सरकारी जवाब के बाद कई जिलों के शिक्षामित्र संगठनों ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह उनके साथ अन्याय है। वे राज्य की शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें न तो आर्थिक स्थिरता दी जा रही है और न ही नौकरी की सुरक्षा।
संभावना है कि आने वाले समय में शिक्षामित्र एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाएं और अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरें।
Disclaimer
इस आर्टिकल में दी गई जानकारी विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और उत्तर प्रदेश विधानसभा में दिए गए सरकारी बयानों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य सिर्फ आपको ताज़ा अपडेट देना है, न कि किसी सरकारी निर्णय की पुष्टि करना। किसी भी आधिकारिक जानकारी या बदलाव के लिए कृपया संबंधित विभाग या राज्य सरकार की आधिकारिक वेबसाइट से ही पुष्टि करें।