SBI, PNB, BOI – क्या भारत में जल्द ही सिर्फ़ 4 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक रह जाएँगे? विवरण देखें

Saroj kanwar
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भारत में SBI, PNB और BOI बैंक: सरकार बैंकिंग सेवाओं को बेहतर और सरल बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। लोगों की सुविधा के लिए सरकार बैंकिंग व्यवस्था में कई बदलाव कर रही है। अब, सरकार बैंकिंग व्यवस्था में कई बड़े बदलावों की योजना बना रही है, जिसमें बैंकों का विलय और डिजिटल प्रणाली को मज़बूत करना शामिल है। सरकार एक ऐसा बड़ा बदलाव भी लागू कर रही है जिसका असर सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और सार्वजनिक बीमा कंपनियों पर पड़ेगा। SBI, PNB और BOI समेत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रबंधन निजी क्षेत्र के लिए खोलने की तैयारी चल रही है। कहा जा रहा है कि इसकी शुरुआत देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, भारतीय स्टेट बैंक से होगी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में शीर्ष प्रबंधन पदों पर निजी और बाहरी लोगों की भी नियुक्ति की जा सकती है। नए दिशानिर्देशों के अनुसार, SBI में प्रबंध निदेशक के चार पदों में से एक निजी क्षेत्र के उम्मीदवारों को दिया जा सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंकिंग प्रबंधन के पद निजी क्षेत्र के उम्मीदवारों को दिए जा सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नीति आयोग की सिफ़ारिश पर सरकार छोटे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का बड़े बैंकों में विलय कर सकती है। इस महाविलय के तहत, सरकार इंडियन ओवरसीज़ बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ इंडिया और बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र का विलय करने की योजना बना सकती है।

कौन से बैंकों का हो सकता है विलय?

सरकार इंडियन ओवरसीज़ बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ इंडिया और बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र जैसे बैंकों का देश के बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, जैसे भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ़ बड़ौदा, के साथ विलय कर सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रस्ताव पर चर्चा का एक रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसे कैबिनेट बैठक और प्रधानमंत्री कार्यालय में चर्चा के लिए भेजने की तैयारी चल रही है। अगर सब कुछ ठीक रहा और सरकार ने मंजूरी दे दी, तो इन बैंकों का महाविलय वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा हो जाएगा।

सरकार की क्या योजना है?
छोटे बैंकों के बढ़ते खर्च और लगातार बढ़ते एनपीए के कारण बैंकिंग प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार बैंकों का विलय करना चाहती है। ताकि बैंकिंग प्रणाली मज़बूत हो और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो।

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