Sarkari Naukri : लैंटरल एंट्री में बिना परीक्षा के बन सकते है सरकारी अधिकारी, जानें डिटेल 

Saroj kanwar
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lateral entry UPSC : संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा देश में सबसे कठिन पीक्षाओं में से एक है. बहुत कम लोग होते है जो इस परीक्षा को पास करके अधिकारी बनते है. आज हम आफको एक ऐसी एंट्री क बारे में बता रहे है जिसमें बिना किसी परीक्षा के UPSC में अधिकारी बन सकते है.
केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि 2018 से लेकर अब तक केंद्रीय सरकार के विभिन्न विभागों में लैटरल एंट्री के जरिए 63 लोगों की भर्ती की गई है. इन पदों के लिए उम्मीदवारों की विशेषज्ञता और डोमेन नॉलेज को प्राथमिकता दी गई.

लैटरल एंट्री भारत सरकार की एक ऐसी नीति है जिसमें निजी क्षेत्र,अकादमिक संस्थानों, सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) या अन्य गैर-सरकारी क्षेत्रों में केंद्रीय सरकार के मध्य और वरिष्ठ स्तर के प्रशासनिक पदों जैसे जॉइंट सेक्रेटरी, डायरेक्टर और डिप्टी सेक्रेटरी पर नियुक्त किया जाता है.

ये नियुक्तियां आमतौर पर 3 से 5 साल के लिए होता है. अगर आप पदों पर अच्छा काम करते है तो आपकी इस अवधि को भी बढ़ा सकते है. लैटरल एंट्री शुरूआत  2005 में दूसरी प्रशासनिक सुधार समिति (Second ARC) के तहत हुई थी.

उस समय इसके वीरप्पा मोइली अध्यक्ष थे.  2017 में नीति आयोग और शासन पर सचिवों के समूह (SGoS)ने भी इसकी सिफारिश की.2018 में नरेंद्र मोदी सरकार ने इसे औपचारिक रूप से लागू किया जब पहली बार जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के लिए विज्ञापन जारी किए गए.

लैटरल एंट्री की भर्ती के लिए आपको UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) में ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करता है. इसके लिए सभी इच्छुक उम्मीदवारों को संबंधित क्षेत्र में अनुभव और विशेषज्ञता साबित करनी होती है.

उसके बाद आवेदनों की छंटनी के बाद  उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है. जॉइंट सेक्रेटरी के लिए 15 साल का अनुभव और 40-55 साल की उम्र, डायरेक्टर के लिए 35-40 साल और डिप्टी सेक्रेटरी के लिए 32-40 साल की उम्र निर्धारित है.

अभी तक 63 नियुक्तियां 2018, 2021 और 2023 में तीन अलग-अलग चरणों में की गईं. 

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