Ratlam Railway Mandal: रतलाम रेलवे मंडल के यात्रियों को जल्द ही एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। रेलवे ने 38 किलोमीटर लंबे रतलाम ई-केबिन से नागदा तक के सेक्शन में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम की कमीशनिंग कर दी है। वह भी रिकॉर्ड 6 घंटे में छह स्टेशनों पर, जिसमें रतलाम ई-केबिन, बांगरोद, रूनखेड़ा, खाचरोद, बेड़ावन्या और नागदा शामिल है। शनिवार से ट्रेनें एबीएसएस के माध्यम से ही चल रही हैं। इसके समेत अब दिल्ली-मुंबई रूट के मंडल के हिस्से में आने वाले नागदा-गोधरा रेल खंड के दो सेक्शन ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम से लेस हो गए हैं। 5 माह पहले रेलवे ने अप्रैल में 28 किलोमीटर लंबे कांसुधी-पिपलोद सेक्शन में स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली लागू की थी। इस तरह रतलाम मंडल में ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम की कुल कवरेज 66 किलोमीटर हो गई है। पश्चिम रेलवे जोन में ऐसा पहली बार हुआ है जब इतने बड़े रेल खंड में एक साथ ऑटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली लागू की गई है। वर्तमान में पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम और एब्सोल्यूट ब्लॉक सिस्टम से ट्रेनों को चलाया जा रहा है। 19 अगस्त वेस्टर्न रेलवे हेडक्वार्टर के इंजीनियरों की टीम ने सेक्शन में लगाए गए सिस्टम को चेक किया था।
ऑटोमेटिक सिग्नलिंग सिस्टम से ऐसे चलती हैं ट्रेनें
दो स्टेशनों के बीच स्टेशन यार्ड के एडवांस स्टार्टर सिग्नल से आगे प्रत्येक एक किमी पर सिग्नल लगे हैं। इससे आगे वाले सिग्नल में समस्या आई तो पीछे चल रही ट्रेनों को ऑटोमेटिक अलर्ट मिल जाएगा, जिससे ट्रेनों को समय रहते रोका या कंट्रोल किया जा सकेगा। एबीएसएस वाले रेल खंड में एक ट्रेन को खड़ी होने या क्रॉसिंग के समय आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने तक रुकने के बजाय अगला सिग्नल क्रॉस करते ही रवाना हो जाएगी। इससे दो किमी के अंतर पर दो ट्रेनें चल सकती हैं।
नागदा-खाचरौद की ओएचई भी हुई अपग्रेड
उधर मिशन रफ्तार के तहत रेलवे ने नागदा-खाचरौद सेक्शन के ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) प्रणाली को 2 गुणा 25 केवी में अपग्रेड कर लिया है। अब इस सेक्शन में ट्रेनों को 130 की बजाए 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पर चलाया जा सकेगा। मिशन में पूरे रतलाम-नागदा रेल खंड में काम लगभग अंतिम चरण में है। धीरे-धीरे पूरे सेक्शन की ओएचई को अपग्रेड हो जाएगी।
नागदा-गोधरा सेक्शन में लगाई जाएगी प्रणाली
नागदा-रतलाम और कासुंधी-पिपलोद के बाद अब चरणबद्ध नागदा-गोधरा सेक्शन के बाकी हिस्सों में भी एबीएसएस इंस्टाल किया जाएगा। रेलवे ने इसकी तैयारी कर ली है। इतना ही नहीं दिल्ली-मुंबई रूट में आने वाले बाकी सभी मंडलों में यह सिस्टम लग रहा है। रतलाम मंडल में जिस तेजी से काम हुआ, उसमें मंडल रेल प्रबंधक अश्वनी कुमार, वरिष्ठ मंडल संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर (समन्वय) आरएस मीना, मंडल संकेत एवं दूरसंचार इंजीनियर (स्पेशल वर्क्स) दिव्या पारिक की मुख्य भूमिका रही। पीआरओ खेमराज मीणा ने बताया एबीएसएस में रेलवे ने कई अत्याधुनिक उपकरण लगाए हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग विजुअल डिस्प्ले यूनिट, ऑटो सेक्शन इंडिकेशन विजुअल डिस्प्ले यूनिट, मल्टी सेक्शन डिजिटल एक्सल
काउंटर आदि शामिल है।