Ratlam Railway Mandal: यात्रियों का अगले स्टेशन के क्रॉस होने का इंतजार हुआ खत्म, ऑटोमैटिक सिग्नल से एक के पीछे एक चलेंगी ट्रेनें

Saroj kanwar
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Ratlam Railway Mandal: दिल्ली-मुंबई रेल लाइन पर जल्द ही ट्रेनें एक के पीछे एक दौड़ने लगेंगी, वह भी मात्र कुछ किलोमीटर के अंतर से। मिशन रफ्तार के तहत राजधानी रूट को तेजी से ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम (एबीएसएस) से लेस किया जा रहा है। इसमें रतलाम मंडल का नागदा से गोधरा तक का हिस्सा भी शामिल है। रेलवे ने रतलाम से नागदा तक के करीब 38 किमी लंबे सेक्शन में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम का इंस्टॉलेशन पूरा कर लिया है।’

रतलाम रेलवे मंडल में लगाए गए सिस्टम को चेक करने के लिए वेस्टर्न रेलवे हेडक्वार्टर के इंजीनियरों की टीम पहुंची। टीम इसकी रिपोर्ट मुख्यालय को देगी। अप्रूवल मिलने पर रतलाम से नागदा तक एबीएस सिस्टम की कमिशनिंग कर दी जाएगी। रेलवे ने अप्रैल में गोधरा-दाहोद स्टेशनों के बीच 28 किमी लंबे कांसुधी-पिपलोद सेक्शन में स्वचालित ब्लॉक सिग्नलिंग प्रणाली चालू की थी। दिल्ली-मुंबई रूट के दायरे में आने वाले बाकी मंडलों में भी सिस्टम लगाया जा रहा है। संभवतः दो से तीन साल में पूरा रूट लेस हो जाएगा। अभी रेलवे पैनल इंटरलॉकिंग सिस्टम और एब्सोल्यूट ब्लॉक सिस्टम से ट्रेनों को चला रहा है। अब नया ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम इन दोनों की जगह लेगा। डीआरएम अश्वनी कुमार ने बताया कि रतलाम-नागदा सेक्शन में ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम का काम लगभग पूरा हो गया है। मंगलवार को हेडक्वार्टर के इंजीनियरों ने निरीक्षण कर लिया है।

ऐसे काम करता है एबीएसएस

ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम में दो स्टेशनों के बीच प्रत्येक एक किलोमीटर की दूरी पर सिग्नल लगाए जाते हैं। ये स्टेशन यार्ड के एडवांस स्टार्टर सिग्नल से आगे प्रत्येक एक किलोमीटर पर लगाए जाते हैं। इसकी सहायता से ट्रेनें एक के पीछे एक चलती रहेंगी। इसमें आगे वाले सिग्नल में टेक्निकल समस्या आई तो पीछे चल रही ट्रेनों को अपने-आप सूचना मिल जाएगी, जिससे ट्रेनें जहां की तहां रुक जाएंगी।

यह होगा फायदा

खड़ी होने या क्रॉसिंग के समय ट्रेन को रवाना होने आगे चल रही ट्रेन के अगले स्टेशन तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

सिस्टम से एक से दो किमी के अंतर पर दो ट्रेनों को चलाया जा सकेगा। ट्रेनों की लाइव लोकेशन भी कंट्रोल और स्टेशन को मिलती रहेगी।

सिस्टम की कमिशनिंग के बाद रेल लाइनों पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी। संचालन तेज होने से नाई ट्रेनों को चलाने में रेलवे को आसानी होगी।

कुछ खामियां मिलीं, अफसरों को बताई

रतलाम-नागदा सेक्शन में लगाए गए एबीएस सिस्टम को वेस्टर्न रेलवे हेडक्वार्टर के चीफ सिग्नल इंजीनियर उमेश कुमार, इलेक्ट्रिक लोको इंजीनियर विवेक दीक्षित समेत अन्य ने चेक किया। मंगलवार की सुबह लगभग 10.30 बजे इंजीनियरों की टीम विशेष निरीक्षण यान से रतलाम से रवाना होकर नागदा तक गई और वापस लौटी। उपकरणों की लोकेशन व फंक्शन चेक किए। बताया जा रह है कि इसमें कुछ छोटी खामियां मिली हैं, जिन्हें दूर करने के लिए बता दिया है।

यहां भी लगेगा ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम राजधानी रूट के साथ मंडल के नागदा-भोपाल और उज्जैन-इंदौर रेल खंड में भी एबीएस सिस्टम लगाया जाएगा। हेडक्वार्टर ने सब-अम्ब्रेला वर्क में इसकी स्वीकृति दे दी है। लगभग 228.14 किमी लंबे नागदा-भोपाल रेल खंड के 27 स्टेशन पर यह सिस्टम लगाया जाएगा।

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