Raag Ratlami CM Visit :  सूबे के मुखिया की मौजूदगी में हावी रही सियासत की विरासत/ पंजा पार्टी को मिल गया नया मुखिया 

Saroj kanwar
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रतलाम। सूबे के मुखिया को देहात वाले माननीय के बुलावे पर देहाती इलाके में आकर सौगातें देना थी। सूबे के मुखिया चूंकि नजदीक के ही है,और रतलाम से उनका पुराना जुडाव भी है,इसलिए दोपहर में आने की बजाय वे रात को ही आ धमके। पूरे जिला इंतजामिया की धडकनें यह जानकर तेज हो गई कि मुखिया रात को ही आ रहे है। खैर जिला इंतजामिया के अफसरों ने जैसे तैसे सारे इंतजाम किए और मुखिया रतलाम आए। 

उनका आगमन देहाती इलाके के माननीय के बुलावे पर हुआ था,तो माननीय ने अपने गांव में ही उनका कार्यक्रम रखवा दिया।. माननीय का गांव कुण्डाल मुख्य सडक से खासा दूर है इसलिए मुखिया के कार्यक्रम में आने वाले नागरिकों को कई कई किमी पैदल चलना पडा। कई सारे तो वहां तक पंहुच ही नहीं पाए।

मुखिया आए,करोडों की सौगातें देने की घोषणा करके निकल गए। लेकिन अब चर्चा इस बात की है कि देहात वाले माननीय ने इस मौके को बडे खास अंदाज में भुनाया। फूल छाप पार्टी के आयोजनों में आमतौर पर पार्टी के नेताओं को महत्व दिया जाता है,लेकिन यहां परिवारवाद हावी नजर आया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि माननीय ने संगठन की बजाय परिवारवाद को तरजीह दी ताकि सियासत की विरासत अभी से सम्हाली जा सके।

पंजा पार्टी को मिल गया नया मुखिया 

लम्बी जद्दोजहद के बाद पंजा पार्टी को नया मुखिया मिल ही गया। पंजा पार्टी ने इस बार नया मुखिया बनाने के लिए दुनियाभर की नौटंकी की थी। ये नौटंकिया देख कर लोगों को लगा था कि इस बार कोई कमाल होने वाला है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। चार नाम रेस में बताए जा रहे थे। रेस में सबसे आगे एक दरबार थे और ज्यादातर लोगों को उम्मीद थी कि इस बार दरबार को ही मौका मिल जाएगा। लेकिन दरबार पिछड गए और मौका पहलवान को मिल गया।

पहलवान शहर सरकार में पंजा पार्टी के पार्षदों के नेता है। चूंकि वे पहले से नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर है इसलिए लोगों को लगा था कि पार्टी का मुखिया किसी और को बनाया जाएगा। पंजा पार्टी में भी एक व्यक्ति एक पद वाले जुमले पर जोर दिया जाता है। लेकिन इस मामले में पंजा पार्टी ने इस सिद्धान्त को ताक पर रख दिया।

कुल मिलाकर अब पंजा पार्टी में नए मुखियाओं का दौर आ गया है। नए मुखिया रसातल में जाती पंजा पार्टी को कितना सम्हाल पाएंगे ये तो वक्त ही बताएगा,लेकिन पंजा पार्टी में इस बात की बडी चर्चा है कि झाबुआ वाले साहब ने दरबार के साथ खेल कर दिया। वादा दरबार से किया था और ताज पहलवान को पहना दिया।

फूल छाप की टीम का पता नहीं

पंजा पार्टी ने जहां अपना नया मुखिया चुन लिया है,वहीं फूल छाप के मुखिया अपनी टीम नहीं चुन पा रहे हैैं। फूल छाप वाले भईया को अपनी टीम बनाने में भारी मशक्कत का सामना करना पड रहा है। जिले में चार चुने हुए माननीय है और तीन माननीय दिल्ली वाले है। भईया ने इन सभी से अपने समर्थकों के नाम देने को कहा है। ताकि सभी को संतुष्ट किया जा सके।

फूल छाप वाले भईया को उम्मीद थी कि आजादी का दिन आते आते वे अपनी टीम बना ही लेंगे। लेकिन वे बना नहीं पाए। सभी को साधने का चक्कर में देर होती जा रही है और फूल छाप के वो तमाम नेता जो जिले की टीम में जगह पाने के लिए बेताब है,इस देरी से परेशान हो रहे है। 

लगता है कि फूल छाप के नेताओं को जिले की टीम में जगह हासिल करने के लिए अभी और इंतजार करना पडेगा।

काले कोट की सियासत

अदालत के परिसर में इन दिनों जम कर गहमा गहमी मची है। ये सरगर्मियां काले कोट वालों की सियासत को लेकर हो रही है। काले कोट वाले इन दिनों अपने नए नेताओं का चुनाव करने वाले है और इसी के चलते अदालत में मिलने जुलने के दौर चल रहे है। 

काले कोट वाले अगले हफ्ते अपने नेताओँ को चुनने के लिए वोट डालेंगे। चुनावी मैदान में किस्मत आजमाने वाले तमाम लोग काले कोट वालों को अपने पक्ष में लाने के लिए जी तोड मेहनत में जुटे है। घरों पर पंहुचकर मतदाताओं को मनाया जा रहा है,तो कई सारे प्रत्याशी सोशल मीडीया पर हर दिन नई अपीलें जारी कर रहे है। 

चुनाव में कौन कितने वोट हासिल कर पाएगा और जीत किसे हासिल होगी,इसका फैसला ठीक एक हफ्ते बाद होगा। तब तक काले कोट वालों की सियासत उफान पर रहेगी।

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