PF New Rule: भारत में लाखों निजी क्षेत्र के कर्मचारी हर महीने अपनी सैलरी का एक हिस्सा भविष्य निधि यानी प्रॉविडेंट फंड में जमा करते हैं। यह पैसा उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण बचत होती है। लेकिन अब तक पीएफ का पैसा निकालने की प्रक्रिया काफी जटिल और कठिन थी। कर्मचारियों को विभिन्न नियमों और शर्तों का पालन करना पड़ता था। हाल ही में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ ने अपने सदस्यों के लिए बड़ी राहत देते हुए निकासी के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। ये नए नियम कर्मचारियों के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे और उन्हें अपनी जरूरत के समय आसानी से पैसा निकालने में मदद मिलेगी।
ईपीएफओ का ऐतिहासिक निर्णय
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने अपनी केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने की थी। बोर्ड ने देश भर के सात करोड़ से अधिक ईपीएफओ सदस्यों को आंशिक निकासी के नियमों में बड़ी छूट प्रदान की है। अब सदस्य अपनी जमा राशि का शत प्रतिशत तक निकाल सकेंगे जो पहले बहुत सीमित थी। यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए वरदान साबित होगा जिन्हें अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है। पहले कर्मचारियों को अलग-अलग मदों में सीमित राशि ही निकालने की अनुमति थी लेकिन अब यह प्रक्रिया काफी सरल और लचीली हो गई है।
सौ प्रतिशत निकासी की सुविधा
श्रम मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अब ईपीएफओ के अंशधारक सदस्य अपने खाते में जमा संपूर्ण राशि का सौ प्रतिशत तक निकाल सकते हैं। इस राशि में कर्मचारी का योगदान और नियोक्ता का योगदान दोनों शामिल होते हैं। पहले के नियमों में विभिन्न उद्देश्यों के लिए अलग-अलग प्रतिशत की सीमा निर्धारित थी जिससे कर्मचारियों को परेशानी होती थी। अब इस जटिलता को दूर करते हुए पूरी राशि निकालने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि सदस्यों को अपने खाते में कम से कम पच्चीस प्रतिशत राशि न्यूनतम शेष के रूप में बनाए रखनी होगी। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि भविष्य के लिए कुछ बचत अवश्य बनी रहे।
आंशिक निकासी की तीन श्रेणियां
ईपीएफओ ने आंशिक निकासी की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के लिए इसे तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया है। पहली श्रेणी में आवश्यक जरूरतें शामिल हैं जिसमें गंभीर बीमारी का इलाज, बच्चों की उच्च शिक्षा और परिवार में शादी जैसे महत्वपूर्ण कार्य आते हैं। दूसरी श्रेणी में आवासीय जरूरतें हैं जैसे घर खरीदना, घर का निर्माण करना या घर की मरम्मत करवाना। तीसरी श्रेणी में विशेष परिस्थितियां शामिल की गई हैं। इस वर्गीकरण से कर्मचारियों को यह समझने में आसानी होगी कि वे किस कारण से पैसा निकाल सकते हैं। पहले के नियम काफी जटिल थे और कर्मचारियों को विभिन्न दस्तावेज जमा करने पड़ते थे।
शिक्षा और विवाह के लिए बढ़ी सीमा
नए नियमों के अनुसार बच्चों की शिक्षा के लिए पीएफ से पैसा निकालने की सीमा को बढ़ाकर दस बार कर दिया गया है। इसी प्रकार विवाह के लिए निकासी की सीमा पांच बार तक कर दी गई है। यह बदलाव विशेष रूप से उन परिवारों के लिए फायदेमंद है जिनमें एक से अधिक बच्चे हैं। पहले इन मदों में निकासी की संख्या काफी सीमित थी जिससे कर्मचारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। अब वे अपने बच्चों की स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए कई बार पैसा निकाल सकेंगे। विवाह जैसे महंगे आयोजनों के लिए भी पांच बार तक निकासी की सुविधा मिलने से परिवारों पर वित्तीय बोझ कम होगा।
कारण बताने की जरूरत खत्म
नए नियमों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि विशेष परिस्थितियों में पैसा निकालने के लिए अब किसी प्रकार का कारण बताने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले कर्मचारियों को विस्तृत कारण बताना पड़ता था और कई बार उनके आवेदन अस्वीकार भी हो जाते थे। अब इस झंझट से मुक्ति मिल गई है और विशेष परिस्थितियों वाली श्रेणी में किसी भी दावे को अस्वीकार नहीं किया जाएगा। यह प्रावधान कर्मचारियों को अपनी आपातकालीन जरूरतों के लिए तुरंत पैसा निकालने में सक्षम बनाएगा। इससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि मानसिक तनाव भी कम होगा। यह कदम ईपीएफओ की सेवाओं को और अधिक पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने की दिशा में उठाया गया है।
न्यूनतम सेवा अवधि में कमी
पहले के नियमों में पीएफ से पैसा निकालने के लिए न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त अधिक सख्त थी। लेकिन अब इसे घटाकर केवल बारह महीने कर दिया गया है। इसका मतलब है कि यदि कोई कर्मचारी किसी कंपनी में एक वर्ष तक काम कर चुका है तो वह आंशिक निकासी के लिए आवेदन कर सकता है। यह बदलाव विशेष रूप से नए कर्मचारियों के लिए लाभदायक है जिन्हें शुरुआती दौर में पैसों की ज्यादा जरूरत होती है। पहले इतनी जल्दी पैसा निकालना संभव नहीं था जिससे कर्मचारियों को कठिनाई होती थी। अब वे अपनी वास्तविक जरूरतों के लिए समय पर पैसा प्राप्त कर सकेंगे।
अंतिम निपटान और पेंशन निकासी की अवधि में वृद्धि
ईपीएफओ ने परिपक्वता पूर्व अंतिम निपटान की अवधि को भी बढ़ा दिया है। पहले यह अवधि केवल दो महीने थी जिसे अब बढ़ाकर बारह महीने कर दिया गया है। इसी प्रकार अंतिम पेंशन निकासी की अवधि को दो महीने से बढ़ाकर छत्तीस महीने यानी तीन वर्ष कर दिया गया है। यह बदलाव सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अब उन्हें अपने पैसे निकालने के लिए अधिक समय मिलेगा और वे आराम से सभी औपचारिकताएं पूरी कर सकेंगे। इससे सेवानिवृत्ति के बाद की चिंताएं कम होंगी और कर्मचारी अपने भविष्य की योजना बेहतर तरीके से बना सकेंगे।
ईपीएफओ द्वारा लाए गए ये नए नियम देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत हैं। इन बदलावों से न केवल पैसा निकालना आसान हुआ है बल्कि कर्मचारियों को अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिलेगी। सरकार का यह कदम कर्मचारी कल्याण की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। हालांकि सदस्यों को यह ध्यान रखना चाहिए कि पच्चीस प्रतिशत न्यूनतम शेष राशि बनाए रखना अनिवार्य है ताकि भविष्य की सुरक्षा बनी रहे।
Disclaimer
यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है और पाठकों को ईपीएफओ के नए नियमों के बारे में जागरूक करने के लिए है। पीएफ निकासी से संबंधित नियम और शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं। किसी भी प्रकार की निकासी करने से पहले कृपया ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त करें। यह लेख किसी भी प्रकार की वित्तीय सलाह नहीं है। अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। लेखक या प्रकाशक किसी भी प्रकार की हानि या भ्रम के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।