OPS – कर्मचारी NPS के बजाय OPS को क्यों पसंद करते हैं? 69 लाख कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट

Saroj kanwar
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ओपीएस अपडेट: देशभर के कर्मचारी संघ लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। संसद में भी यह मुद्दा बार-बार उठाया गया है, जहां यह तर्क दिया गया है कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) कर्मचारियों को बाजार जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनाती है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर अपना रुख फिर से स्पष्ट किया है।

केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि केंद्र सरकार के पास वर्तमान में लगभग 50.14 लाख कर्मचारी हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में पेंशनभोगी अभी भी पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के तहत पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। ओपीएस में लगभग 69 लाख पेंशनभोगी नामांकित हैं। इसके विपरीत, 31 जनवरी, 2026 तक राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत लगभग 49,802 पेंशनभोगी हैं।

इतना बड़ा अंतर क्यों है?
इस महत्वपूर्ण अंतर का कारण यह है कि ओपीएस उन कर्मचारियों पर लागू होता था जिन्होंने 1 जनवरी, 2004 से पहले सरकारी सेवा शुरू की थी, जबकि एनपीएस उन लोगों के लिए है जिन्होंने उस तारीख के बाद सेवा शुरू की। सरकार ने पिछले तीन वर्षों में एनपीएस के तहत मासिक पेंशन भुगतान में देरी का कोई मामला दर्ज नहीं किया है। वित्त मंत्रालय और पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) दोनों को ही पेंशन सेवा प्रदाताओं से देरी के संबंध में कोई शिकायत नहीं मिली है।

ओपीएस की बहाली पर सरकार का रुख
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ओपीएस को बहाल करने का निर्णय पूरी तरह से राज्य सरकारों पर निर्भर है, क्योंकि उनके कर्मचारियों की पेंशन नीतियां उनके अधिकार क्षेत्र में आती हैं। हालांकि, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने ओपीएस की बहाली के खिलाफ चेतावनी दी है, यह बताते हुए कि इससे राज्य के वित्त पर दीर्घकालिक पेंशन देनदारी बढ़ सकती है।
इन वित्तीय चेतावनियों के बावजूद, कर्मचारी संघों के दबाव के कारण कई राज्यों ने पुरानी पेंशन योजना को फिर से अपना लिया है। इनमें राजस्थान, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और झारखंड शामिल हैं।

ओपीएस, एनपीएस और यूपीएस में क्या अंतर है?
पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस): यह एक निश्चित लाभ वाली पेंशन प्रणाली थी। इस योजना के तहत, कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पर उनके अंतिम वेतन का 50% और नियमित महंगाई भत्ता मिलता था। इसमें कर्मचारी का कोई अंशदान नहीं होता था।
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस): यह एक निश्चित अंशदान प्रणाली है। कर्मचारी और सरकार दोनों ही बाजार से जुड़े पेंशन कोष में अंशदान करते हैं। अंतिम पेंशन जमा की गई राशि और अर्जित प्रतिफल पर निर्भर करती है।

एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस): सरकार ने हाल ही में एनपीएस के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए यूपीएस शुरू की है। इसका उद्देश्य अंशदान प्रणाली को बनाए रखते हुए अधिक पूर्वानुमानित और सुनिश्चित पेंशन लाभ प्रदान करना है।

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