अब सरकारी टीचर्स नहीं करा सकेंगे ट्यूशन ,नहीं किया इन आदेशों का पालन तो विभाग करेगा ये तगड़ी कार्यवाही

Saroj kanwar
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शीषका विभाग ने सरकारी स्कूलों की शिक्षकों के ट्यूशन पढ़ाने पर रोक लगाने के लिए नहीं गाइडलाइन जारी की है। सरकारी स्कूलों के शिक्षक निजी ट्यूशन या कोचिंग सेंटर पढ़ने का काम नहीं कर सकेंगे। हालाँकि शिक्षकों अपने घर पर अधिकतम तीन बच्चों की ट्यूशन के अनुमति दी गई है लेकिन इसके लिए संस्था प्रधान से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा ।

नई गाइडलाइन के अनुसार ,हर शैक्षणिक स्तर की शुरुआत में शिक्षकों को यह शपत पत्र भरना होगा कि निजी ट्यूशन है कोचिंग सेंटर में पढ़ने का काम नहीं करेंगे । शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश जारी कर दिया। इन आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अधिकारियों ,स्कूल के संस्था प्रधानों की पर होगी।

शिकायत मिलने पर होगी कार्रवाई

शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि ,कई जगहों पर सरकारी शिक्षकों द्वारा कोचिंग सेंटर चलाने और ट्यूशन पढ़ने के मामले सामने आए हैं। इन शिकायतों के आधार पर शिक्षा निदेशक ने यह गाइडलाइन जारी की है। आदेशों के अनुसार ,जिन शिक्षकों पर कोचिंग सेंटर चलाने या बिना अनुमति ट्यूशन पढ़ने की शिकायत मिलेगी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गाइडलाइन में संस्था प्रधानों को शिक्षकों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रमुख ऐसे शिक्षकों की पहचान करें जो विभागीय स्वीकृति के बिना निजी ट्यूशन या कोचिंग सेंटर चला रहे हैं। इसके अलावा स्कूल निरीक्षण के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी छात्रों के को व्यक्तिगत रूप से बातचीत कर वस्तु स्थिति की जानकारी लेंगे ।

ट्यूशन पर रोक का उद्देश्य

शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया की यह कदम छात्रों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार करने और शिक्षकों को उनके दायित्वों का एहसास करने के लिए उठाया गया है। अक्सर यह देखा गया है कक्षा में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने या शिक्षकों की अपनी कर्तव्यों को ना समझने के कारण प्राइवेट मिशन और शिक्षकों के अपने कर्तव्यों ना समझने के कारण प्राइवेट ट्यूशन का चलन बढ़ रहा है। इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए गाइडलाइन लागू की गई है। गाइडलाइन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छात्रों को कक्षा में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और उन्हें निजी ट्यूशन की आवश्यकता न पड़े। शिक्षा विभाग का मानना है कि सरकारी स्कूलों के शिक्षक अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षण प्रदान करें, जिससे निजी ट्यूशन की मांग कम हो सके।

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