10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल! स्कूल-बैंक, बसों और रेलवे पर क्या होगा असर, जानिए

Saroj kanwar
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देश भर में आज 9 जुलाई भारत बंद (Bharat Bandh) का आह्वान किया गया है। इस हड़ताल में 25 करोड़ से अधिक श्रमिकों के शामिल होने की उम्मीद है। इस स्ट्राइक के पीछे एक बड़ी वजह है, जिसे केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच ने देशव्यापी हड़ताल पर जाने का किया है। जिससे देश में स्कूल, बैंकिंग, बीमा, डाक, कोयला खनन और राज्य परिवहन समेत विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारी शामिल हो रहे हैं। तो चलिए जानते हैं कि इस बंद का स्कूलों, बैंकों और अन्य सेवाओं पर क्या असर पड़ेगा।

स्कूल और कॉलेज पर असर

सामने आई खबरों में अभि तक किसी भी राज्य सरकार ने भारत बंद के कारण स्कूलों और कॉलेजों में आधिकारिक छुट्टी नहीं घोषित हुई है, जिससे देश के अधिकांश राज्यों में स्कूल और कॉलेज सामान्य रूप से खुले रहेगें। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की कमी या सड़क जाम के कारण छात्रों और शिक्षकों को परेशानी हो सकती है। जहां संगठन के लोग इसके विरोध करेगें।

 बैंक होगीं बंद?

देश में आज बैंकों ने कोई आधिकारिक अवकाश घोषित नहीं की है। हालांकि आप को बता दें कि बैंक कर्मचारी यूनियनों, जैसे कि ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन भी हड़ताल में शामिल होने जा रहा है। जिसके वजह से कई जगहों पर बैंकिंग सेवाएं, जैसे नकद लेनदेन, चेक क्लीयरेंस और शाखा सहायता पर असर हो सकता है। इसके आलावा बंगाल प्रोविंशियल बैंक इम्प्लॉइज एसोसिएशन ने भी इस हड़ताल में भाग लेने की पुष्टि की है।

ऐस स्थिति में ग्राहकों से अपेक्षा की जाती है कि इस समय डिजिटल बैंकिंग सेवाएं जैसे एटीएम, ऑनलाइन बैंकिंग और यूपीआई लेनदेन करें, जिससे आप का कोई काम न अटके और  नजदीकी बैंक शाखा से पहले संपर्क करें ताकि असुविधा से बचा जा सके।

बीमा और डाक सेवाएं पर हड़ताल का असर

इस हड़ताल में बैंकिंग के साथ-साथ बीमा क्षेत्र के कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं। जिससे यहां पर कई जगह पर क्लेम प्रक्रिया, पॉलिसी सेवाएं आदि प्रभावित हो सकती हैं।  देश की डाक सेवाओं  असर हो सकता है।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की हैं ये मांगे

तो वहीॉ भारत बंद के पीछे कई वजह है, जिससे 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के मंच ने अपनी मांगो के लिए सरकार से कई बार अवगत कराया है, जिसस सरकार पिछले 10 वर्षों से वार्षिक श्रम सम्मेलन नहीं करने, मौजूदा आर्थिक नीतियों को बेरोजगारी, महंगाई और मजदूरी में गिरावट को लेकर मांगे है।

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