नेशनल हाईवे 44 की सर्विस लेन को दुरुस्त करने हेतु अब 15 करोड रुपए की राशि खर्च की जाएगी। इस नेशनल हाईवे की सर्विस लाइन दुरुस्त करने हेतु इस बार जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट कंपनी को ठेका दिया गया है। बता दें कि इससे पहले पलाईओवर और सर्विस लेन बनाने वाली श्रीमंगलम बिल्डकॉन कंपनी को इसका ठेका दिया गया था। लेकिन यह कंपनी गारंटी पीरियड खत्म होने तक इस सड़क को दुरुस्त नहीं कर सकी। इसके बाद एनएचएआई ने ग्वालिर-आगरा नेशनल हाईवे की मरम्मत के लिए नई कंपनी महावीर कंस्ट्रक्शन को नियुक्त किया है। इस बार पहले से दोगुना बजट स्वीकृत किया है।
हालांकि वर्तमान में मरम्मत के नाम पर 4 दिन पहले बैरियर चौराहे पर करीब 100 मीटर इलाके में बारीक गिट्टी बिछाकर भ्रष्टाचार के गड्डों को छिपाया जा रहा है। खास बात यह है कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे में एनएच 44 को भी शामिल किया गया है। मतलब, तीन महीने बाद ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का टेंडर लेने वाली जीआर इंफ्रा प्रोजेक्ट यहां काम शुरू करेगी। तब तक अधिकारी रिपेयरिंग में मोटा खर्चा दिखाते रहेंगे।
टोल से रोज हो रही है डेढ़ करोड़ रुपए कमाई
नेशनल हाईवे 44 पर रोज लगभग 49 लाख का टोल अकेले छौंदा टोल नाके के जरिए वसूल किया जाता है। यह टोल इसलिए लगाया जाता है ताकि लोगों को चलने के लिए बेहतर सड़क मिल सके। इस हाईवे के ग्वालियर खंड पर ही 3 टोल नाके हैं। इनसे रोज लगभग डेढ़ करोड़ रुपए एनएचएआई को मिलते हैं। मेंटेनेंस कंपनी के काम की निगरानी के लिए भी एनएचएआई ने थर्ड पार्टी कंपनी को नियुक्त कर रखा है लेकिन मुरैना शहर में बैरियर चौराहे से उद्योग विभाग चौराहे तक बनाई गई सर्विस लेन को गड्डों और जल भराव से मुक्ति नहीं मिल सकी है। वीमॉक्स कंपनी से एनएचएआई ने ग्वालियर से चंबल पुल तक के गड्ढे बमुश्किल एक बार भी नहीं भरवा पाए और एक साल समय बीत गया।