MP News: मप्र में तीसरे दिन भी तहसीलदारों की हड़ताल जारी, राजस्व संबंधित कामकाज हुआ ठप

Saroj kanwar
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MP News: मध्य प्रदेश में तहसीलदारों की हड़ताल तीसरे दिन भी जारी रही। प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर तहसीलदारों की हड़ताल से आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल के चलते राजस्व से संबंधित हजारों मामले अटक गए हैं। बता दें कि मप्र राजस्व अधिकारी संघ (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) के आह्वान पर तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। इससे इन दिनों प्रदेश के रतलाम जिले की सभी तहसीलों में राजस्व संबंधी कामकाज पूरी तरह ठप है। प्रशासन ने इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की है। जावरा विधानसभा की 2 तहसील व 3 टप्पा तहसीलों में 3 दिन में 600 राजस्व मामलों की सुनवाई नहीं हो पाई। अभी जावरा-पिपलौदा तहसील में 3203 मामले राजस्व संबंधी लंबित हैं।

हड़ताल का आम जनता पर पड़ रहा है सीधा असर

तहसीलों में हड़ताल का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। पक्षकार अपने-अपने मामलों की सुनवाई के लिए तहसीलों में पहुंचते हैं लेकिन हड़ताल के चलते उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। सभी तहसीलों में होने वाली सुनवाई की तारीखें आगे बढ़ा दी गई हैं। सिर्फ राजस्व मामलों की सुनवाई ही नहीं बल्कि सीमांकन, बंटवारा, नामांतरण समेत अन्य राजस्व कार्यों की फाइलें भी अटक गईं। ईडब्ल्यूएस, जाति प्रमाण-पत्र जैसे आवेदनों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। रिकॉर्ड दुरुस्ती जैसे मामलों की सुनवाई के लिए दी तारीखें भी टाल दी गईं क्योंकि ये कार्य अभी तहसीलदार के बिना होना संभव नहीं।

शनिवार को हड़ताल के तीसरे दिन रतलाम जिले के सभी तहसीलदार व नायब तहसीलदारों ने विधायक को मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही उन्होंने कहा मांग का निराकरण नहीं होने तक हड़ताल जारी रहेगी। तहसीलदारों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जितनी लंबी खिंचेगी, आगे उतनी ही समस्या बढ़ती जाएगी। ज्ञापन के दौरान जावरा तहसीलदार पारस वैश, आलोट तहसीलदार पंकज पवैया, बाजना तहसीलदार मनीष जैन, ताल तहसीलदार निर्भय सिंह, सैलाना तहसीलदार कुलभूषण शर्मा सहित नायब तहसीलदार वैभव जैन, पिंकी साठे, प्रतिभा भाभर, संदीप इवने, सविता राठौर आदि मौजूद थीं।

राजस्व न्यायालयों के विभाजन को लेकर हो रहा विरोध

दरअसल राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर-न्यायिक वर्गों में किए जा रहे विभाजन को लेकर संवर्ग नाराज है। 16 जुलाई 2025 को जिला इकाइयों और 17 जुलाई 2025 को प्रांतीय कार्यकारिणी ने ज्ञापन देकर मुख्य सचिव को समस्याओं से अवगत कराया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि योजना 3 माह तक केवल 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू होगी। राजस्व न्यायालयों का विलय नहीं होगा। गैर-न्यायिक अधिकारियों को जरूरी संसाधन दिए जाएंगे। इसके विपरीत योजना को धार, भिंड, खरगोन, बालाघाट, मंदसौर, देवास, कटनी, मंडला और रीवा में लागू करते हुए 9 जिलों में राजस्व न्यायालयों का विलय कर दिया। मामले में विरोध के बावजूद अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसे लेकर हड़ताल चल रही है।

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