MP News: मध्य प्रदेश में 7000 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसर के पद खाली, जानिए इन पदों पर कब तक आएगी वैकेंसी

Saroj kanwar
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MP News: मध्य प्रदेश उच्च शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा शिक्षकों की कमी बन रही है।एक तरफ सरकार लगातार नए कॉलेज खोल रही है वहीं दूसरी तरफ बढ़ने के लिए कॉलेज में शिक्षकों की कमी देखने को मिल रही है। एक आंकड़ा सामने आया है जिसमें पता चला है कि राज्य में 7000 से अधिक सहायक प्रधानाध्यापकों के पद खाली पड़े ह। इन पदों के खाली होने से पढ़ाई में काफी ज्यादा दिक्कत आ रही है।

असिस्टेंट प्रोफेसर और सहायक प्रधानाध्यापकों के पद खाली होने से पढ़ाई में काफी ज्यादा दिक्कतें आने लगी है। सरकार के द्वारा इन पदों को कब तक भरा जाएगा इसको लेकर कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि एक मंत्री ने जानकारी दिया कि इन सभी पदों पर जल्द ही वैकेंसी आएगी जिससे पढ़ाई में आने वाली बढ़ाएं दूर होगी।

प्रदेश के शासकीय कॉलेजों में प्राध्यापकों की 75% पद खाली हैं। 2020 में प्रदेश के कॉलेजों में प्राध्यापकों के 860 पद स्वीकृत थे, जो पांच साल में 12 कम होकर 848 हो गए। इन 5 सालों में 26 कार्यरत प्राध्यापक बढ़ गए और रिक्त पद 28 कम हो गए। पीएससी ने प्राध्यापकों की सीधी भर्ती 2011-12 में की थी। इसके बाद से प्राध्यापकों के पद पर कोई विज्ञापन जारी नहीं किया।

सरकार ने भी स्वीकारा


हाल ही में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने विधानसभा में एक सवाल के जवाब में जानकारी दी कि प्रदेश के 17 शासकीय यूनिवर्सिटीज में 93 पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। इनमें सहायक प्राध्यापकों के स्वीकृत 1069 पदों में 74 फीसदी खाली हैं यानी सिर्फ 236 पद भरे हुए हैं।

पांच विवि में एक भी सहायक प्राध्यापक नहीं
प्रदेश के पांच विश्वविद्यालय राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा, क्रांतिवीर तात्याटोपे विश्वविद्यालय गुना, क्रांति सूर्या टंट्या भील विश्विद्यालय खरगोन, महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्विद्यालय छतरपुर, रानी अवंतिवाई लोधी विश्विद्यालय सागर में एक भी सहायक प्राध्यापक नहीं है।

569 कॉलेजों में रिक्त पदों की संख्या 64% बढ़ी


प्रदेश में कुल 569 शासकीय महाविद्यालय है, जिनमें 2024 तक सहायक प्राध्यापकों के 12895 पद स्वीकृत थे, जिनमें से सिर्फ 5611 कार्यरत है जबकि 56त्न पद खाली है। आंकड़ों पर नजर डाले तो पिछले पांच सालों में स्वीकृत पदों की संया 29त्न बढ़ी है, कार्यरत सहायक प्राध्यापक 13त्न कम हुए हैं और रिक्त पदों की संया 64% बढ़ी है।

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