MP News : एमपी में मिट्टी में मिल गया करोड़ों का अनाज, न इंसानों के काम आया और न ही पशुओं के खाने के लायक 

Saroj kanwar
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मध्यप्रदेश में भंडारण में लापरवाही से करोड़ों का खाद्यान्न खुले में पड़े होने से सड़कर मिट्टी में मिल गया है। बारिश के बाद अब इससे दुर्गंध फैल रही है और वहां पर रहने वाले लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। प्रशासन जांच का हवाला देकर इसके इंतजाम को लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

यह अनाज सिरमौर के नजदीक उमरी गांव के कैप में खुले में पड़ा है। बीते कई वर्षों से धूप, पानी के बीच रहने से यह खराब हो चुका है और सड़कर मिट्टी में मिलने लगा है। इसकी निगरानी नागरिक आपूर्ति निगम और विपणन संघ करता है। इन दिनों दोन विभाग इसको लेकर उदासीन हैं। इसके पहले भी खुले में अनाज पड़े होने को लेकर शिकायत सामने आई थी, जिस पर कलेक्टर ने निर्देशित किया था कि जो भी खाद्यान्न बचा है, उसकी जांच प्रक्रिया पूरी होने तक उसका रखरखाव ठीक तरीके से किया जाए।

इस पर मैदानी कर्मचारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई। यहां से निकलने वाली दुर्गंध लोगों के घरों तक पहुंचती है, जहां लोग परेशान हैं। स्थानीय रहवासियों ने बताया कि इसी खाद्यान्न के भीतर कई मवेशी भी मरे हुए हैं। ग्रामीणों ने इस समस्या को कई बार प्रशासन को बताया, लेकिन कोई उचित पहल नहीं की गई।

1710 मीट्रिक टन का हिसाब ही नहीं

उमरी कैप में भंडारित कराए गए खाद्यान्न में 1710 मीट्रिक टन का हिसाब नहीं मिल रहा है। संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों ने कभी यह बताया कि खाद्यान्न चोरी हो गया तो कभी बारिश में भीगने का बहाना बनाया, लेकिन इसके कोई ठोस तथ्य अब तक नहीं मिल पाए हैं। इस खाद्यान्न की कीमत उस दौर में सवा तीन करोड़ रुपए थी लेकिन वर्तमान समर्थन मूल्य में यह साढ़े चार करोड़ के करीब है। 

उमरी कैप में रखे खाद्यान्न की जांच वर्ष 2010 से चल रही है। यहां पर धान और गेहूं के भंडारण में कई वर्षों के स्टॉक में विसंगतियां पाए जाने से जांच शुरू की गई है। प्रथम दृष्टया बद्री प्रसाद सेन नाम के कर्मचारी पर कार्रवाई भी की गई थी। उसके बाद मामला हाईकोर्ट चला गया और वहां से अब तक इसकी जांच लगातार जारी है।

मामले से जुड़े कई आरोप सामने आए हैं। कई जनप्रतिनिधियों ने भी आरोप लगाया है कि पूर्व में धान और गेहूं बरसात में भीगने के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी की जाती रही है। अलग-अलग वर्षों में खराब हुए खाद्यान्न को लेकर कई वर्षों से जांच मेंमामला लंबित है।

रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा  कि यह गबन का प्रकरण है। वर्ष 2010 से जांच चल रही है। मार्कफेड को जिम्मेदारी दी गई थी कि जब तक कोई निराकरण नहीं होता तो इसकी देखरेख करें। अब जानकारी आई है कि अव्यवस्थित है, इसलिए निर्देशित किया है कि जो भी स्टॉक है, उसके संरक्षण का इंतजाम कराया जाए। 

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