MP में जनधन खाताधारकों को मिला ज्यादा कर्ज, अब यही बन रहे सबसे बड़े डिफॉल्टर

Saroj kanwar
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MP News: मध्यप्रदेश में जनधन खातों के जरिए ग्रामीण और कमजोर वर्ग को बैंकिंग से जोड़ा गया। राज्य में अब तक 4.44 करोड़ जनधन खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें 61% ग्रामीणों और 56% महिलाओं के नाम पर हैं। इन्हीं लोगों को प्राथमिकता श्रेणी में रखकर केंद्र और राज्य सरकार ने विभिन्न योजनाओं जैसे मुद्रा, स्टार्टअप, स्वनिधि के तहत अधिक कर्ज दिया।

मध्यप्रदेश में इन वर्गों को राष्ट्रीय औसत 10% के मुकाबले 22.5% तक कर्ज बांटा गया। लेकिन अब यही लोग सबसे ज्यादा डिफॉल्टर बनकर सामने आ रहे हैं। राज्य का प्राथमिकता क्षेत्र में डिफॉल्ट रेट 9.3% है, जो देश के औसत 4.5% से दोगुना है।

सरकार ने कर्ज तो दिया, लेकिन लोगों को यह समझ नहीं दी कि लोन चुकाना जरूरी क्यों है, समय पर भुगतान कैसे करें, और दोबारा लोन पाने के लिए क्या करना होगा। नतीजा यह हुआ कि लोन की वसूली नहीं हो रही और बैंक अब इन वर्गों को कर्ज देने से कतराने लगे हैं।2024-25 में ग्रामीण बैंकों ने निर्धारित लक्ष्य का सिर्फ 49.7% लोन दिया।

स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने और भी कम, सिर्फ 32.9% और सहकारी बैंकों ने 59.6% लक्ष्य पूरा किया। इससे साफ है कि लोन वितरण अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है। कृषि क्षेत्र को सबसे ज्यादा 30.5% कर्ज मिला, लेकिन यह सबसे ज्यादा एनपीए वाला भी बन गया है। किसान समय पर फसल बेच न पाने और भुगतान में देरी को इसकी वजह मानते हैं।

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