राजस्थान में जयपुर डेयरी ने डेयरी किसानों के लिए क्रय मूल्य में बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक समर्थ योजना के तहत किसानों को प्रति लीटर दूध पर ₹5 अतिरिक्त सब्सिडी दी जा रही है। इसके साथ ही जयपुर डेयरी ने ₹1.5 प्रति लीटर की वृद्धि की घोषणा की है, जिससे दूध उत्पादक किसानों को त्योहारों से पहले बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा।
महाराष्ट्र की गोकुल डेयरी ने भी किसानों के हित में कदम उठाते हुए खरीद मूल्य में ₹1 प्रति लीटर का इजाफा किया है। इस वृद्धि का असर उपभोक्ता कीमतों में भी दिखाई देगा, जिससे वहां भी दूध महंगा हो गया है।
क्यों बढ़े दूध के दाम
दूध के दाम बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण है दूध उत्पादन लागत में इजाफा। गर्मी और हीटवेव के कारण पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता पर असर पड़ा है। इसके अलावा पशु आहार, बिजली, पानी और परिवहन की लागत में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। मदर डेयरी के अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में दूध की खरीद लागत ₹4-₹5 प्रति लीटर तक बढ़ चुकी है, जिसे पूरा करने के लिए ₹2 की वृद्धि आवश्यक हो गई।
सरकार की ओर से सीधे दूध की कीमत तय नहीं की जाती, लेकिन वह डेयरी किसानों के लिए योजनाएँ चलाकर उन्हें समर्थन देती है। उदाहरण के लिए, राजस्थान की मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक समर्थन योजना में राज्य सरकार किसानों को ₹5 प्रति लीटर की मदद देती है। इसका उद्देश्य है ग्रामीण आय बढ़ाना और डेयरी उत्पादन को प्रोत्साहित करना।
किन राज्यों में सबसे अधिक असर
दिल्ली-एनसीआर और अहमदाबाद जैसे शहरी इलाकों में दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ा है। वहीं, जयपुर, कोटा और कोल्हापुर जैसे क्षेत्रों में किसानों को इस बढ़ोतरी से राहत मिलेगी। कुल मिलाकर, उपभोक्ताओं पर अब प्रतिदिन ₹2-₹3 का अतिरिक्त बोझ आने वाला है, जबकि किसानों की कमाई में समानांतर बढ़ोतरी हो रही है।
आम लोगों को यह राहत मिली है कि फिलहाल दूध के साथ आने वाले डेयरी उत्पाद जैसे दही, पनीर या चीज़ की कीमतें नहीं बढ़ाई गई हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अगर उत्पादन लागत आगे भी बढ़ती रही, तो आने वाले हफ्तों में इन उत्पादों के दाम भी ऊपर जा सकते हैं।
निष्कर्ष
आज से लागू हुए नए दूध के दाम उपभोक्ताओं के लिए थोड़ी कठिनाई जरूर बढ़ाते हैं, लेकिन किसानों के लिए राहत लेकर आए हैं। यह कदम डेयरी उद्योग को स्थिर रखने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए जरूरी बताया जा रहा है। उम्मीद है कि सरकार और डेयरी कंपनियाँ मिलकर ऐसे कदम उठाएँगी जिससे उपभोक्ताओं पर बोझ कम हो और किसानों की आमदनी बनी रहे ।