Mandsaur News: गांधी सागर जल विद्युत इकाई का बदलेगा स्वरूप, 465 करोड़ रुपए से होगा टरबाइनों का नवीनीकरण, बनेगा कम्प्यूटराइज्ड स्टेशन 

Saroj kanwar
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Mandsaur News: मंदसौर जिले में 65 साल पुरानी गांधी सागर जल विद्युत इकाई अब आधुनिक होने जा रही है। लगभग 465 करोड़ रुपए से अगले पांच वर्षों में 23-23 मेगावाट क्षमता की पांचों टरबाइनों का नवीनीकरण किया जाएगा। इसके लिए फरीदाबाद की फ्लोवेल कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी हो चुका है।
नवीनीकरण के बाद पावर स्टेशन पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड होगा। नई तकनीक से कंट्रोल सिस्टम छोटा और आधुनिक बनेगा। ऑटोमेशन के कारण छोटी-बड़ी तकनीकी समस्याओं का निदान तुरंत हो सकेगा। मशीनों का पांच साल का डाटा तुरंत देखा जा सकेगा। 

अधीक्षण यंत्री अरुण यादव का कहना है कि प्राथमिकता बंद पड़ी 5वीं टरबाइन को चालू करने की है। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से बाकी टरबाइनों का नवीनीकरण किया जाएगा। कार्य के दौरान भी 92 मेगावाट उत्पादन जारी रहेगा और नवीनीकरण के बाद स्टेशन अपनी पूरी क्षमता यानी 115 मेगावाट पर लौट आएगा। नवीनीकरण की कवायद से जहां बिजली उत्पादन क्षमता दोगुनी मजबूती के साथ लौटेगी, वहीं ऑटोमेशन से रखरखाव आसान हो जाएगा। किसान और उद्योग जगत को स्थिर बिजली आपूर्ति का सीधा लाभ मिलेगा। बांध से नियंत्रित जल प्रवाह के कारण आसपास के क्षेत्रों में भी राहत बनी रहेगी।

2019 में आई बाढ़ से डूबा था पावर स्टेशन 

2019 की भारी बारिश में पूरा जल विद्युत गृह डूब गया था। इसके चलते सभी यूनिटें बंद हो गई थीं। बाद में 2022 में दो यूनिटें, 2023 में एक और जनवरी 2024 में चौथी यूनिट शुरू हुई। फिलहाल 5वीं यूनिट अभी बंद है। बता दें कि गांधी सागर पावर स्टेशन की शुरुआत 1957 में हुई और नवंबर 1960 से उत्पादन शुरू हुआ। उस दौर में मात्र 18.40 करोड़ रुपए में बांध और पावर स्टेशन का निर्माण पूरा कर लिया गया था। यह उस समय एशिया का सबसे कम लागत और समय पर पूरा हुआ बांध माना गया। इसकी गुणवत्ता और समयबद्धता को देखते हुए मुख्य अभियंता एके चाहर को पद्मश्री सम्मान भी मिला। गांधी सागर से सिर्फ मंदसौर ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों को बिजली मिलती है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 30 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया जा चुका है जबकि 2024-25 में 276 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन का रिकॉर्ड रहा।

गांधी सागर बांध से लगातार दूसरे दिन भी खुले रहे तीन छोटे स्लूज गेट

गांधी सागर बांध से लगातार दूसरे दिन भी तीन छोटे स्लूज गेट खुले रहे। शनिवार दोपहर 3 बजे से रविवार रात 9 बजे तक 30 घंटे में कुल 17 लाख 38 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शनिवार को जहां डेढ़ लाख क्यूसेक की आवक दर्ज हुई थी, वहीं रविवार को यह घटकर 62 हजार क्यूसेक रह गई। इससे नदी के निचले हिस्सों का बहाव भी धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।

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