Land Registry New Rule: जमीन रजिस्ट्री में नया नियम! अब बिना कागज के होगी रजिस्ट्री

Saroj kanwar
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Land Registry New Rule: भारत में जमीन की खरीद-फरोख्त के दौरान होने वाली रजिस्ट्री हमेशा से एक जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया रही है। लोगों को तहसील या रजिस्ट्री ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती थी। लेकिन अब केंद्र सरकार ने एक बड़े बदलाव की घोषणा की है, जिसके तहत जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है।

सरकार का कहना है कि डिजिटल भूमि रजिस्ट्री की शुरुआत से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा। इसके साथ ही अब किसी को अनावश्यक कागजी कार्यवाही करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। यह नई सुविधा आम लोगों के लिए जमीन के सौदों को बेहद आसान और सुरक्षित बनाने का काम करेगी।

जमीन रजिस्ट्री की ऑनलाइन सुविधा

नए नियम के अनुसार अब जमीन की रजिस्ट्री के लिए लोगों को तहसील कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है, जहां पर लोग आसानी से अपनी जमीन की रजिस्ट्री करा सकते हैं। इस पोर्टल का उद्देश्य है कि लोग घर बैठे सुरक्षित और सरल तरीक़े से रजिस्ट्री करवा सकें।

इस डिजिटल व्यवस्था से आम नागरिकों को काफी राहत मिलेगी। पहले जहां दिन भर सरकारी दफ्तरों में लाइन लगानी पड़ती थी, वहीं अब इंटरनेट के जरिए कुछ ही क्लिक में संपूर्ण प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी। इससे सिस्टम तेज, आधुनिक और प्रभावी हो जाएगा।

नए नियम में जरूरी दस्तावेज

नई प्रणाली के तहत केवल बिक्री पत्र (सेल डीड) ही पर्याप्त नहीं होगा। इसके अतिरिक्त कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जमा करने होंगे ताकि प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी रहे। इनमें एग्रीमेंट टू सेल, पावर ऑफ अटॉर्नी, सेल सर्टिफिकेट और न्यायालय का आदेश जैसी चीजें शामिल होंगी।

इन सभी दस्तावेजों की आवश्यकता इसलिए रखी गई है ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद उत्पन्न न हो। इससे फर्जीवाड़े की संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी और असली मालिकाना हक वाले व्यक्ति को ही जमीन पर अधिकार मिल सकेगा।

बायोमेट्रिक पहचान की प्रक्रिया

जमीन रजिस्ट्री से जुड़े नए नियम में आधार कार्ड के माध्यम से बायोमेट्रिक सत्यापन को अनिवार्य किया गया है। इसका मतलब यह है कि व्यक्ति को अपने फिंगरप्रिंट या अन्य बायोमेट्रिक पहचान की पुष्टि करनी होगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि रजिस्ट्री कराने वाला व्यक्ति असली पहचान का धारी है।

यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि कोई भी नकली या अवैध व्यक्ति जमीन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में शामिल न हो सके। इससे सरकार को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। भूमि लेन-देन की प्रक्रिया अधिक जिम्मेदारीपूर्ण और पारदर्शी बन जाएगी।

जमीन रजिस्ट्री की वीडियो रिकॉर्डिंग

नए कानून के तहत रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में यदि किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न होता है तो वीडियो रिकॉर्डिंग गवाही का काम कर सके। इस प्रावधान से प्रक्रिया में विश्वास और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

रिकॉर्डिंग का फायदा यह होगा कि हर कदम का डिजिटल सबूत मौजूद रहेगा। यदि भविष्य में अदालत या किसी अन्य संस्थान को प्रमाण की आवश्यकता पड़े तो यह वीडियो प्रमाणिक साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकेगा।

ऑनलाइन भुगतान की सुविधा

अब रजिस्ट्री फीस का भुगतान लोगों को नकद करने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार ने इस प्रक्रिया को भी डिजिटल बना दिया है। इच्छुक व्यक्ति यूपीआई, डेबिट कार्ड या अन्य ऑनलाइन माध्यमों से आसानी से भुगतान कर सकते हैं। यह लोगों को समय और धन दोनों की बचत करने में मदद करेगा।

ऑनलाइन भुगतान से भ्रष्टाचार में कमी आएगी क्योंकि नकद पैसों के आदान-प्रदान का झंझट खत्म हो जाएगा। साथ ही, लेन-देन का रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप से सुरक्षित रहेगा। यह पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।

देशभर में लागू होने की तिथि

सरकार के अनुसार यह नियम अभी संसद में पेश किया जाना है और दिसंबर 2025 से इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि कुछ ही महीनों में देश भर के लोग डिजिटल रजिस्ट्री की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

नए बदलाव के बाद भारत भूमि रजिस्ट्री प्रणाली में एक नई क्रांति देखेगा। लोग कहीं से भी ऑनलाइन पूरे कार्य संपन्न कर पाएंगे और उन्हें किसी भी कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यह वास्तव में एक बड़ा सुधार है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी सरकारी अधिसूचनाओं और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। किसी भी निर्णय से पहले संबंधित विभाग या आधिकारिक पोर्टल से जानकारी अवश्य प्राप्त करें।

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