80 करोड़ के बजट की इस फिल्म ko लगा बनने में 6 साल का समय ,हीरो बोलै पहली बार फिल्म देखकर हो गया था दुखी लेकिन….

Saroj kanwar
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साउथ की फिल्मों की टॉपिक इन दिनों काफी हटकर है। कहानी से लेकर टेक्नोलॉजी तक हर एक morche डायरेक्टर और एक्टर नए-नए नजर आ रहे है। ऐसी एक फिल्म ‘गामी’ है जिसकी चर्चा है दिनों जोरों पर है । फिल्म में विश्वास सेन और चांदनी चौधरी लीड रोल में है। हाल ही में’ गामी’ का एक प्री रिलीज इवेंट हुआ था।

इसमें विश्वास सेन ने ‘गामी ‘को लेकर चौंकाने वाली बात की। उन्होंने कहा की फिल्म को देखकर जब मैं निकला तो मैं काफी दुखी था । वैसे यह बात काफी चौंकाने वाली ह। लेकिन ये बात उन्होंने फिल्म की कहानी को लेकर कहा।

मैं आंखें बंद करके अपने डायरेक्टर विद्याधर पर भरोसा किया

‘गामी ‘के एक्टर विश्वास सेन ने कहा कि , मैं आंखें बंद करके अपने डायरेक्टर विद्याधर पर भरोसा किया। मैं जिंदगी में कई शानदार लोगों से मिला हूं लेकिन विद्याधर उन सब में सबसे ईमानदार है। गामी की वजह से मुझे एक दोस्त और एक फैमिली मेंबर मिला। हमने बहुत ही ईमानदारी के साथ फिल्म बनाइ।

गामी के लिए हमने कई रिस्क लिए और उम्मीद है कि उनका फलअब हमें मिलेगा। गामी को देखने के बाद में बहुत ही भारी मन के साथ निकला। गामी में को आसानी से भुलाया नहीं जा सकता और घर जाने के बाद भी ये आपको सताती है। यह एक ऐसी फिल्म है जिस पर सबको गर्व होगा। हमारी पूरी टीम में सिर्फ चांदनी एक लड़की थी। हिमालय की ऊंचाई में भी उन्होंने बहुत ही शानदार तरीके से शूटिंग को अंजाम दिया ।

इसका बजट लगभग 80 करोड़ रुपए का बताया जा रहे हैं

विश्वास सेन की गामी की बात करें तो इसका बजट लगभग 80 करोड़ रुपए का बताया जा रहे हैं। ये तेलुगू फिल्म है। इस फिल्म की शुरुआत क्राउड फंडिंग के जरिए हुई थी । लेकिन बाद में यू क्रिएशन इसके साथ जुड़ गई और फिल्म ने अलग ही रूप अख्तियार कर लिया फिल्म 8 मार्च को रिलीज हो रही है और फैंस के बीच इस फिल्म का बहुत बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है।

गामी एक एडवेंचर ड्रामा फिल्म है इसे बनाने में लगभग 6 साल का समय लगा है। फिल्म की शुरुआत 2018 में हुई थी फिल्म में अघोर के विषय को उठाया गया है। विश्वाश इसमें अघोर के किरदार में देखा जा सकता है। विश्वास सेन की ‘गामी’ की कहानी शंकर की है जो एक अघोर है और माली की पत्तियों की खोज में निकला है ।

इनकी पत्तियों को उसके अलग किस्म की बीमारी का इलाज संभव है। यह पत्तियां 36 साल में निकलती है /वह भी हिमालय की द्रोणागिरी की पहाड़ियों में /ऐसे में शंकर को तय समय में अपने सफर को पूरा करना है वरना उसे 36 साल का इंतजार करना पड़ेगा। यह सफर में आंध्र प्रदेश की एक देव दासी और वैज्ञानिक भी उसके साथ है। इस तरह तीन लोगों का सफर है।

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