मक्का और सोयाबीन फसलों पर कीटों का प्रकोप, किसानों में बढ़ी चिंता 

Saroj kanwar
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Burhanpur News: सोयाबीन और मक्का की फसलों पर कीटों के प्रकोप से किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन में येलो मोजेक वायरस और मक्का में फॉल आर्मी वॉर्म कीटों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। इन कीटों से फसलों की स्थिति को देखते हुए उपसंचालक कृषि मनोहर सिंह देवके और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. कार्तिकय सिंह ने खकनार क्षेत्र के गांवों का दौरा किया और फसलों का निरीक्षण किया।उपसंचालक कृषि देवके ने बताया कि मक्का की फसल पर फॉल आर्मी कीटों का अटैक हुआ है। इसके नियंत्रण के लिए उन्होंने एमामेक्टिन बेंजोएट का उपयोग करने की सलाह दी, जो 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव किया जाए। इसके साथ ही डॉ. कार्तिकय सिंह ने कहा कि खरीफ फसलों की बोवनी को एक माह से अधिक हो चुका है और अब खेतों में नमी बनाए रखने के लिए निंदाई, गुड़ाई और डोरा चलाने की सलाह दी गई है।

वे किसानों को यह भी सलाह देते हैं कि दरारें पड़ने से पहले जीवनरक्षण सिंचाई जरूरी है। सोयाबीन की फसल में गर्डल बीटल का प्रकोप भी देखा गया है। इसे नियंत्रित करने के लिए कृषि अधिकारियों ने किसानों को प्रोफेनोफॉस 50 ईसी या ट्रायजोफास 4.0 ईसी दवाइयों का उपयोग करने की सलाह दी है। इसके साथ ही पीला मोजेक वायरस के फैलाव को रोकने के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप कार्ड लगाने की सलाह दी गई है, जिससे सफेद मक्खी पर नियंत्रण किया जा सके।

बारिश के कारण सोयाबीन की फसल पहले ही कमजोर हो चुकी थी, और अब बड़ी इल्लियां हमला कर रही हैं। ये इल्लियां पत्तियों को खाकर पौधों को पूरी तरह से खराब कर रही हैं। किसानों ने बताया कि वे दवाइयों का छिड़काव कर रहे हैं, लेकिन इल्लियां खत्म नहीं हो रही हैं। एक पौधे पर 7 से 8 इल्लियां देखी गई हैं। इस समस्या के समाधान के लिए, किसानों को एम्पलिगो या क्यूनालफास का छिड़काव करने की सलाह दी गई है, जिससे इल्लियां नष्ट हो सकती हैं।

किसानों का कहना है कि कृषि विभाग को पंचायत स्तर पर चौपाल लगाकर फसलों की स्थिति के बारे में जानकारी देना चाहिए। इस समय बारिश और कीटों का प्रकोप मिलकर किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

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