Incredible Animals :  ये 8 जानवर अंतरिक्ष में भी रह सकते है जिंदा, जानें डिटेंल 

Saroj kanwar
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8 Incredible Animals : दुनिया में बहुत ही अजीबोगरीब जानवर पाए जाते है. कुछ जानवर तो ऐसे होते है जिनके बारे में आप लोगों ने कभी नहीं सुना होगा. सभी जानवर मैदानी इलाके और पर्वतीय इलाकों में रह सकते है.

क्या आप जानते है कि जानवर अंतरिक्ष में भी रह सकते है? अगर नहीं, तो चलिए आज हम आपको इन जानवरों के बारे में बताते है. बहुत से ऐसे जानवर है जो अंतरिक्ष में भी जिंदा रह सकते है.

हम बात कर रहे है टार्डीग्रेड, तिलचट्टा, नेमाटोड वर्म, ब्राइन श्रिम्प और फ्रूट फ्लाइज जैसे कई जीव अंतरिक्ष में जिंदा रह सकते है. अंतरिक्ष में न ऑक्सीजन होती है, न हवा और न ही पानी होता है.

अंतरिक्ष में वैक्यूम, कॉस्मिक रेडिएशन और कभी बहुत ज्यादा ठंड तो कभी बहुत ज्यादा गर्मी जिसके कारण किसी की मृत्यु भी हो सकती है. 

टार्डीग्रेड

टार्डीग्रेड छोटे-छोटे माइक्रोस्कोपिक जीवों में से एक हैं जो उबलते पानी, जमने वाली ठंड, रेडिएशन और यहां तक कि स्पेस के वैक्यूम में भी आसानी से जिंदा रह सकते हैं. वैज्ञानिकों ने साल 2007 में टार्डीग्रेड को अंतरिक्ष में भेजा था.

जिसके बाद ये जीवित वापस लौट आए थे. टार्डीग्रेड ‘क्रिप्टोबायोसिस’ की मदद से खुद को कई सालों तक बिना खाएं-पिए जिंदा रख सकते है. 

तिलचट्टा 

तिलचट्टा यानी कॉकरोच से बहुत से लोग डरते है. कॉकरोच किसी को कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाता है. वैज्ञानिकों ने साल 2007 में रूस के Foton-M3 स्पेस मिशन में तिलचट्टों के अंडों को अंतरिक्ष के रेडिएशन में रखा  था.

कॉकरोच के अंडे अंतरिक्ष में सही सलामत से फूटे और तिलचट्टे वहां पर जिंदा रहे. 

नेमाटोड वर्म 

NASA ने नेमाटोड वर्म  को कोलंबिया स्पेस शटल मिशन पर भेजा था. लेकिन स्पेस शटल के री-एंट्री के दौरान हादसा हो गया था, लेकिन ये छोटे वर्म्स फिर भी जिंदा रहे थे. नेमाटोड वर्म  का इस्तेमाल मांसपेशियों की कमजोरी, उम्र बढ़ने और जेनेटिक बदलावों के लिए किया जाता है. 

ब्राइन श्रिम्प

झींगा का नाम आप लोगों ने सुना होगा. कई राज्यों में इसे खाया भी जाता है. ब्राइन श्रिम्प यानी छोटे झींगा सूख जाने के बाद भी जिंदा रह सकते हैं. झींगा के अंडों को स्पेस में भेजा गया.

अंडों में झींगा सही सलामत निकल गए और जिंदा भी रहे. झींगा का इस्तेमाल फिलहाल अंतरिक्ष मिशनों में बंद ईकोसिस्टम बनाने के लिए  किया जा रहा है. 

फ्रूट फ्लाइज 

सबसे पहले स्पेस में जाने वाले फ्रूट फ्लाइज यानी छोटे फल मक्खियां जीव थे. इन्हें साल 1947 में अमेरिका ने अंतरिक्ष में भेजा था. ये जल्दी-जल्दी प्रजनन करती हैं और वैज्ञानिक इनका उपयोग माइक्रोग्रैविटी और रेडिएशन का असर समझने में करते हैं.

चूहे 

वैज्ञानिकों ने चूहों को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर कई बार भेजा गया है. चूहे का शरीर इंसानों की तरह रिएक्ट करता है. माइक्रोग्रैविटी में उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और मांसपेशियों की ताकत कम हो जाती है, लेकिन चूहे स्पेस में इंसानों के स्वास्थ्य पर असर समझ पाते हैं.

फंगस  

कुछ फंगस की प्रजातियां, जैसे Cryptococcus neoformans और Cladosporium sphaerospermum अंतरिक्ष के रेडिएशन में भी जिंदा रहती हैं. 

जेब्राफिश

मछलियों को आप लोगों ने केवल पानी में तैरता हुआ देखा है. वैज्ञानिकों ने जेब्राफिश अंतरिक्ष शोध में का अहम जीव माना गया है.

जेब्राफिश का डीएनए इंसानों से मिलता-जुलता है और उनका शरीर पारदर्शी होता है. इनके भ्रूण ने अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक विकास किया है.

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