Haryana Village Liquor Ban: हरियाणा सरकार ने राज्य की ग्राम पंचायतों को यह विशेष अधिकार दे दिया है कि वे अपने क्षेत्र में शराब की बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित कर सकती हैं। इसके तहत यदि ग्राम सभा यह तय करती है कि उनके गांव में शराब नहीं बिकनी चाहिए, तो सरकार उस क्षेत्र में ठेका जारी नहीं करती।
शराबबंदी के लिए पंचायतों को क्या करना होता है?
यदि कोई ग्राम पंचायत अपने क्षेत्र में शराबबंदी लागू करना चाहती है, तो उसे 31 दिसंबर तक ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर लिखित सूचना खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (BDPO) के माध्यम से आबकारी विभाग को भेजनी होती है। इसके बाद पंचकूला मुख्यालय सरपंच से राय लेकर अंतिम निर्णय लेता है कि उस गांव में शराब का ठेका खुलेगा या नहीं।
29 पंचायतों ने भेजा प्रस्ताव, केवल 14 को मिली मंजूरी
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले की 29 ग्राम पंचायतों ने शराबबंदी के पक्ष में प्रस्ताव भेजे, लेकिन सरकार ने इनमें से केवल 14 प्रस्तावों को स्वीकृति दी। जबकि 15 पंचायतों के प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया। यह दर्शाता है कि पंचायतों की राय के बावजूद अंतिम फैसला नियमों और प्रक्रियाओं के आधार पर लिया जाता है।
इन गांवों में लागू होगी पूर्ण शराबबंदी
सरकार ने जिन 14 गांवों में शराबबंदी को मंजूरी दी है, वहां शराब की कोई दुकान नहीं खोली जाएगी। ये गांव हैं। बाबडोली, भाड़ावास, करनावास, पावटी, नंगलिया रणमौख, नैनसुखपुरा, मुरलीपुर, गुर्जर माजरी, भटसाना, बेरली खुर्द, जखाला, प्राणपुरा। इन गांवों में शराब की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।इन पंचायतों के प्रस्ताव हुए अस्वीकृत
कुछ ग्राम पंचायतों द्वारा भेजे गए प्रस्ताव नियमों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। इसलिए उन्हें खारिज कर दिया गया। खारिज होने वाले गांवों के नाम हैं। मालाहेड़ा, बिहारीपुर, असदपुर, मांढैया खुर्द, ततारपुर इस्तमुरार, कतोटपुर बुजुर्ग, नेहरूगढ़, किशनपुर, कृष्णनगर, जाहिदपुर, भूरथला, माजरी दुदा, आराम नगर कनूका। इन क्षेत्रों में आगामी वर्ष में शराब के ठेके चालू रहेंगे।पंचायती राज अधिनियम में हुआ बदलाव
हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 31 में संशोधन कर पंचायतों को यह कानूनी अधिकार प्रदान किया गया है कि वे शराब की बिक्री पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित कर सकती हैं। साथ ही, यदि कोई अवैध रूप से शराब बेचता है, तो पंचायत पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है।नियमों से टकरा रही पंचायतों की मंशा
हालांकि पंचायतों द्वारा प्रस्ताव पारित करने की प्रक्रिया सरल कर दी गई है, लेकिन आबकारी विभाग के नियम कई बार ग्राम सभाओं की इच्छाओं पर भारी पड़ जाते हैं। यही वजह है कि सभी प्रस्तावों को स्वीकृति नहीं मिल पाती।
सरकार और पंचायतों के बीच संतुलन जरूरी
यह ज़रूरी हो गया है कि सरकार और पंचायतें मिलकर स्थानीय समाज की ज़रूरतों और इच्छाओं के अनुरूप निर्णय लें। शराबबंदी जैसे मुद्दों पर जनता की भागीदारी और जागरूकता भी अहम भूमिका निभा सकती है।
शराबबंदी से गांवों में उम्मीद की किरण
जिन गांवों में शराबबंदी लागू होगी। वहां सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है। यह नशे की लत से मुक्ति की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।