Delhi High Court : दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से मकान मालिक खुशी से नाचने लगे, दिल्ली हाईकोर्ट ने किराएदारों को दिया तगड़ा झटका।

Saroj kanwar
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Delhi High Court, Property Owner’s Rights : मकान मालिक और किरदार के बीच अक्सर किसी न किसी बात को लेकर लड़ाई झगड़ा होता रहता है। अक्सर मामले कोर्ट तक पहुंच जाए करते हैं। अब दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से किरदारों को तगड़ा झटका मिला है। वही मकान मालिकों के हक में बड़ा फैसला सुनाया गया है। आईए जानते हैं क्या कहा है दिल्ली हाई कोर्ट ने।

Tenancy Law : दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले से मकान मालिक में खुशी का माहौल

अपनी प्रॉपर्टी किराए पर देने वाले प्रॉपर्टी मालिकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। दरअसल दिल्ली हाई कोर्ट ने अब मकान मालिकों के हित में एक अहम फैसला सुनाया है।

Delhi High Court के इस अहम फैसला से जहां मकान मालिक के कई अधिकारी स्पष्ट होते हैं, वही किराएदार को तगड़ा भी झटका लगता है। इस निर्णय में किराएदार को लेकर कोर्ट की तरफ से टिप्पणी किया गया है। हाई कोर्ट क्या यह फैसला हर प्रॉपर्टी मलिक के लिए जानना बहुत ही जरूरी है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या कहा?

प्रॉपर्टी का इस्तेमाल किस तरह से करना चाहिए, यह किरदार नहीं बल्कि प्रॉपर्टी मलिक ही तय करेगा। हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में यह स्पष्ट बात बताया है।

Delhi High court : हाई कोर्ट की तरफ से यहां तक कहा गया कि कोई भी मकान मालिक अपने घर में कैसे रहेगा, इसका फैसला अदालत भी नहीं कर सकता है किरदार कैसे मकान मालिक को प्रॉपर्टी उसे करने के आदेश या फिर सलाह दे सकते हैं। मकान मालिक अपनी मर्जी के अनुसार प्रॉपर्टी का इस्तेमाल कर सकते हैं।

अब इस स्थिति में किरायेदारों को करना होगा मकान खाली

कोर्ट के तरफ से मकान मालिक और किराएदार से जुड़ा एक मामला टिप्पणी करते हुए कहा गया कि कोई भी किरदार यह तय नहीं कर सकता कि उसका मकान मालिक अपनी संपत्ति कैसे इस्तेमाल कर रहा है। नहीं किरदार को यह अधिकार होता है। हाई कोर्ट के तरफ से किराएदार को बेदखल करने के लिए दायित्व आज का पर यह निर्णय सुनाया गया है। हाई कोर्ट ने किराएदार को 6 महीने में मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं।

मकान मालिक और किराएदार के बीच यह था मामला

एकदम पट्टी के मकान में साल 1989 से लेकर 2003 तक एक किराएदार रहा था। जब मकान मालिक ने उसे घर खाली करने के लिए कहे तो किरदार ने साफ मना कर दिया। मकान मालिक ने तारक में कहा था कि वह बीमारी के चलते अपने घर में नर्सिंग स्टाफ रखेगा और उसकी तलाकशुदा बेटी घर में रहेगी। किराएदार ने मकान मालिक से यह भी कहा था कि उसके पास काफी जगह और प्रॉपर्टी है, इसमें वह उन दोनों को बिना जगह खाली कारण एडजस्ट कर सकता है।

निचली अदालत में सुनाया गया था यह फैसला

निचली अदालत में किरदार के हक में फैसला सुनाया था। किराया नियंत्रण अदालत ने कहा था की बीमारी के चलते जगह खाली करवाने वाले प्रॉपर्टी मलिक के ओर से उसकी बीमारी और चिकित्सा स्थिति के पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए गए हैं।

हाई कोर्ट ने सबूत को लेकर कही थीं यह बात

दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से ट्रायल कोर्ट के फैसले से अस्ति जताई और कहा कि इस मामले में मकान मालिक की ओर से दिए गए सबूत स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं, और पर्याप्त कहे जा सकते हैं। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने बुजुर्ग को चुके मकान मालिक के हक में फैसला सुनाया गया।

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