Credit Card : 10 साल से क्रेडिट कार्ड बंद, 33 लाख का भेज दिया बिल, बैंक पर तगड़ा जुर्माना

Saroj kanwar
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Credit Card : क्रेडिट कार्ड का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है। आज के समय में लोग आसानी से क्रेडिट कार्ड बनवा पा रहे हैं। वहीं, क्रेडिट कार्ड को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जो हर एक क्रेडिट कार्ड धारक को पता होना चाहिए। क्रेडिट कार्ड धारक को किस प्रकार से परेशानी भी उठानी पड़ सकती है, इस खबर के माध्यम से जानते हैं- 

HR Breaking News (Credit Card over due) क्रेडिट कार्ड का प्रयोग लोग अपनी सुख सुविधाओं के लिए करते हैं, लेकिन कई बार यह एक आफत बन जाता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां क्रेडिट कार्ड बंद कर देने के 10 साल बाद एक व्यक्ति को 33.83 लाख रुपए का डिमांड नोटिस मिला है। यह नोटिस मिलने के बाद ग्राहक की हवा टाइट हो गई। 

ग्राहक पहुंचा कंज्यूमर कोर्ट 


नोटिस मिलने के बाद ग्राहक ने कंज्यूमर कोर्ट का रास्ता अपनाया। यहां से ग्राहक को हर्जाना मिला है। बता दें कि मामला कर्नाटक के मैसूर का है। यहां पर 27 अगस्त 2010 को वेंकटेश नामक व्यक्ति ने क्रेडिट कार्ड बंद करने का रिक्वेस्ट डाला था और 15500 का बकाया भी जमा कर दिया था। इसके बाद बैंक में अकाउंट बंद कर दिया था। 

फिर 10 साल बाद मिला झटका 


बैंक अकाउंट में क्रेडिट कार्ड बंद करने के बाद वेंकटेश निश्चित हो गया था, लेकिन लंबे समय तक पैसा नहीं सका। 10 साल बाद 25 दिसंबर 2010 को बैंक की तरफ से एक लीगल नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें 33.83 लाख रुपये का बकाया बताया गया। इसके बाद उसके पास बैंक से कॉल, मैसेज आने शुरू हो गए। 15 जून 2022 को एक बार फिर से लीगल नोटिस भेज दिया गया। 


कोर्ट में जा पहुंचा मामला 


लीगल नोटिस मिलने के बाद वेंकटेश ने परेशान होकर 18 जून 2022 को बैंक में लिखित जवाब दिया, लेकिन इससे बात नहीं बनी तो यह मामला जिला के कंज्यूमर फोरम में जा पहुंचा। वेंकटेश ने बताया कि 10 साल पहले उसने क्रेडिट कार्ड बंद कर दिया था और ट्रांजैक्शन भी नहीं की है। ऐसे में ड्यूज सेटल करने का सवाल ही नहीं उठता है। 


जाने अदालत ने क्या कहा 


इस मामले में 2024 में फैसला आ चुका है, जिसमें अदालत ने वेंकटेश के पक्ष में फैसला दिया है। कोर्ट की ओर से वेंकटेश को बैंक से 100000 रुपये का हर्जाना दिलाया गया। साथ में अवार्ड की डेट से भुगतान होने तक 10 प्रतिशत का ब्याज दिलवाया और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹3000 दिलवाए गए। 

उपभोक्ता कोर्ट के फैसले से नाखुश दिखे वेंकटेश फिर हुआ यह 


जिला उपभोक्ता फोरम ने जो फैसला दिया, वेंकटेश उस से नाखुश दिखाई दिए और उन्होंने कर्नाटक स्टेट कंज्यूमर कमिशन में अपील दायर की। 12 फरवरी 2026 को फिर से उनके पक्ष में फैसला आया और आयोग ने बैंक को 500000 रुपये हर्जाना देने के निर्देश दिए। एक लाख रुपया वकील की फीस 50000 मुकदमा खर्च दिलवाया और 30 दिन के अंदर भुगतान न होने पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज देने की बात कही।

राज्य आयोग की तरफ से माना गया किए है कि यह अनफेयर ट्रेड प्रेक्टिस है। कोई व्यक्ति अपने भुगतान को जमा कर चुका है और क्रेडिट कार्ड बंद कर चुका है तो उसको कैसे इतने रुपए चुकाने को कहा जा सकता है। इससे ग्राहक को मानसिक रूप से परेशानी होती है और सिबिल स्कोर भी खराब हो जाता है।

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