CIBIL Score Rule:सिबिल स्कोर को लेकर आरबीआई ने बनाए नए नियम, लोन रिजेक्ट किया तो बताना होगा कारण CIBIL Score Rule

Saroj kanwar
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CIBIL Score Rule: आज के दौर में सिबिल स्कोर सिर्फ एक लोन स्वीकृति का आधार नहीं बल्कि व्यक्ति की आर्थिक विश्वसनीयता का प्रमाणपत्र बन गया है. चाहे नौकरी की बात हो या घर किराए पर लेने की, अब हर जगह क्रेडिट स्कोर की मांग की जा रही है. ऐसे में हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पांच नए नियम लागू किए हैं, जिनसे क्रेडिट स्कोर की पारदर्शिता और ग्राहकों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी.

नए नियमों से क्रेडिट प्रणाली में बढ़ेगी पारदर्शिता


RBI द्वारा जारी 5 नए दिशानिर्देश न केवल ग्राहकों के हितों की रक्षा करते हैं, बल्कि बैंकिंग प्रणाली को भी अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाते हैं. इन नियमों का पालन न करने पर संबंधित बैंक या संस्था पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.

अब स्कोर जांचते ही ग्राहक को मिलेगा नोटिफिकेशन


पहला और सबसे अहम बदलाव यह है कि कोई भी बैंक या वित्तीय संस्था जब भी ग्राहक का सिबिल स्कोर जांचेगी, उसे तुरंत एसएमएस या ईमेल के माध्यम से ग्राहक को सूचित करना होगा. इससे ग्राहक को पता चल सकेगा कि कौनसी संस्था उसके स्कोर की जांच कर रही है, और अनधिकृत जांच से निजता का उल्लंघन नहीं होगा.


लोन रिजेक्शन का कारण बताना अब अनिवार्य


दूसरा बड़ा नियम यह है कि अगर कोई बैंक या एनबीएफसी किसी ग्राहक का लोन या क्रेडिट कार्ड आवेदन अस्वीकार करती है, तो उसे कारण स्पष्ट रूप से बताना अनिवार्य होगा. इससे ग्राहक को अपनी कमजोरियों को समझने और उन्हें सुधारने का अवसर मिलेगा.

हर साल एक बार मुफ्त क्रेडिट रिपोर्ट का हक


तीसरे नियम के अनुसार, अब सभी क्रेडिट सूचना कंपनियों को प्रत्येक ग्राहक को साल में एक बार फ्री में उसकी पूरी क्रेडिट रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी. यह सुविधा कंपनी की वेबसाइट पर सीधे लिंक के रूप में मिलेगी ताकि ग्राहक बिना किसी एजेंसी के अपना वित्तीय रिकॉर्ड खुद देख सकें.

डिफॉल्टर घोषित करने से पहले देनी होगी सूचना


RBI के चौथे आदेश में बैंकों को अब किसी भी ग्राहक को डिफॉल्टर घोषित करने से पहले सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया है. इससे ग्राहक को अपनी स्थिति सुधारने का एक अंतिम अवसर मिलेगा और वह बिना किसी अन्याय के डिफॉल्टर टैग से बच सकता है.


स्कोर में गलती हो तो 30 दिन में समाधान जरूरी


पांचवें और अंतिम नियम के तहत यदि किसी ग्राहक के क्रेडिट स्कोर में कोई त्रुटि है, तो बैंक और क्रेडिट ब्यूरो को उसे 30 कार्यदिवसों में सुधारना अनिवार्य होगा. इसमें बैंक को 21 दिन और क्रेडिट एजेंसी को 9 दिन का समय मिलेगा. समय पर समाधान न करने पर प्रतिदिन ₹100 का जुर्माना लगेगा.

ग्राहक को मिलेंगे और भी फायदे


इन नियमों के लागू होने से ग्राहकों को महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, और वह अपनी वित्तीय स्थिति पर बेहतर नियंत्रण रख सकेंगे. इसके साथ ही अगर कोई संस्था उनके स्कोर की अनधिकृत जांच करती है, तो वे सीधे शिकायत दर्ज कर सकते हैं.

बैंकिंग प्रणाली में बढ़ेगी जवाबदेही


अब बैंक और वित्तीय संस्थानों को केवल लाभ के बारे में नहीं, बल्कि ग्राहकों की गोपनीयता और अधिकारों के प्रति भी संवेदनशील बनना पड़ेगा. यह नियम सिस्टम को जवाबदेह और पारदर्शी बनाएंगे.


इन नियमों से होगी भारतीय बैंकिंग प्रणाली में क्रांति


RBI के यह नए नियम भारत की बैंकिंग प्रणाली में एक क्रांतिकारी परिवर्तन लाते हैं. ग्राहक अब केवल बैंक पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी क्रेडिट रिपोर्ट, स्कोर और स्थिति पर स्वयं निगरानी रख सकेंगे.

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