बीओबी बनाम एसबीआई: इन दिनों, अगर भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में कोई सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक निवेशकों की उम्मीदों पर खरा उतर रहा है, तो वह बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के प्रभावशाली परिणामों के बाद, बीओबी ने साबित कर दिया है कि यह सिर्फ एक “सरकारी बैंक” नहीं है, बल्कि एक तेजी से विकसित और कुशलतापूर्वक संचालित संस्था है। मजबूत एनआईएम (शुद्ध ब्याज मार्जिन) और अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर इसका बढ़ता ध्यान इसे अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अलग करता है।
एनआईएम और मुनाफे में रिकॉर्ड प्रदर्शन
बैंक ऑफ बड़ौदा ने तीसरी तिमाही में सबको चौंका दिया। बैंक का शुद्ध लाभ 25% बढ़कर ₹4,500 करोड़ से अधिक हो गया, जो विश्लेषकों के अनुमानों से कहीं अधिक था। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, बीओबी ने अपने एनआईएम को लगभग 3.40% पर बनाए रखा है, जो सराहनीय प्रदर्शन है। इसका मतलब है कि बैंक अपने ऋण देने और जमा लेने की लागत के बीच एक स्वस्थ अंतर बनाए रखने में सक्षम रहा है। अंतरराष्ट्रीय कारोबार बीओबी के कुल मुनाफे में लगभग 20-22% का योगदान देता है, जिससे इसकी आय में विविधता आती है और यह घरेलू बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है।
अंतर्राष्ट्रीय विस्तार
बैंक ऑफ बड़ौदा भारत के उन चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है जिनकी विदेशों में मजबूत उपस्थिति है। लंदन, न्यूयॉर्क, दुबई और सिंगापुर जैसे प्रमुख वैश्विक वित्तीय केंद्रों में इसकी शाखाएं और सहायक कंपनियां मौजूद हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क न केवल बैंक को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद करता है, बल्कि भारतीय अनिवासी (एनआरआई) ग्राहकों को आकर्षित करके एक स्थिर और कम लागत वाला जमा आधार भी प्रदान करता है।
प्रबंधन का लक्ष्य अब अपने अंतर्राष्ट्रीय परिचालन को और मजबूत करना है, विशेष रूप से व्यापार वित्त और प्रेषण के क्षेत्रों में। यह अनूठा लाभ इसे अन्य घरेलू सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर स्पष्ट बढ़त देता है जिनकी वैश्विक पहुंच इतनी व्यापक नहीं है।
परिसंपत्ति गुणवत्ता और ऋण वृद्धि
बीओबी ने अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता में लगातार सुधार किया है। इसका सकल एनपीए घटकर 3.07% हो गया है, जबकि शुद्ध एनपीए मात्र 0.75% है। यह दर्शाता है कि बैंक ने अपने खराब ऋणों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन किया है और भविष्य के लिए एक मजबूत बैलेंस शीट का निर्माण किया है।
बैंक ने ऋण वृद्धि के मोर्चे पर भी अच्छा प्रदर्शन किया है। खुदरा ऋणों में 25% से अधिक और लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) सेगमेंट में 18% की वृद्धि इसके ऋण भंडार के स्वस्थ विस्तार को दर्शाती है। प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2026 के लिए अपने ऋण वृद्धि अनुमान को 14-16% पर बरकरार रखा है, जो भविष्य के लिए एक मजबूत दृष्टिकोण का संकेत देता है।
क्या यह एसबीआई के बाद दूसरा सबसे अच्छा बैंक है?
बैंक ऑफ बड़ौदा, एसबीआई के बाद भारत का सर्वश्रेष्ठ और सबसे कुशल सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक बनने की दौड़ में निस्संदेह सबसे आगे है। इसका मजबूत शुद्ध लाभ, विविध आय स्रोत (विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय कारोबार से), और लगातार बेहतर होती परिसंपत्ति गुणवत्ता इसे निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती है।
हालांकि, इसे अभी भी “सर्वश्रेष्ठ” का खिताब हासिल करने के लिए कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जैसे कि डिजिटल सहभागिता को और बेहतर बनाना और बड़े पैमाने पर ग्राहक अधिग्रहण में तेजी लाना। फिर भी, इसके वर्तमान प्रदर्शन और भविष्य की रणनीति को देखते हुए, बीओबी निश्चित रूप से “होल्ड” या “एक्युमुलेट” रेटिंग का हकदार है, खासकर उन निवेशकों के लिए जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग क्षेत्र में विविधीकरण की तलाश में हैं।